
फरीदाबाद: जिले में तीन नंबर स्थित ईएसआइसी अस्पताल और नागरिक अस्पताल में मरीजों को शुद्ध पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। जिन अधिकारियों पर नागरिकों की स्वास्थ्य सेवा की जिम्मेदारी है। वहां भी कई जगह पानी में मानकों से अधिक टीडीएस है। गुणवत्ता की कसौटी पर पानी खरा नहीं उतर रहा है। ईएसआइसी अस्पताल, डीन कार्यालय, जिला नागरिक अस्पताल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा ईएसआइ हेल्थ केयर विभाग की सिविल सर्जन डा. पूता भारद्वाज के कार्यालय में पानी के टीडीएस की जांच की गई तो पता चला कि अधिकारी-कर्मचारी शुद्ध पानी पी रहे हैं। मगर आम नागरिक सामान्य से कई गुना टीडीएस वाला पानी पी रहे हैं।
यहां मानकों के अनुसार नहीं है पानी
विशेषज्ञ कहते हैं कि शुद्ध पेय जल में स्टैंडर्ड मानकों के अनुसार टीडीएस (टोटल डिसाल्वड सालिडस) की मात्रा 150 से कम होनी चाहिए, मगर यहां तो कई जगह मानकों से अधिक टीडीएस मिला। जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय और नागरिक अस्पताल में आपूर्ति किए जा रहे पानी में टीडीएस की मात्रा 534 थी।
तीन नंबर ईएसआइसी मेडिकल कालेज व अस्पताल में आपूर्ति किए जा रहे पानी में टीडीएस 407 मिला। ईएसआइसी मेडिकल कालेज के डीन कार्यालय में उपलब्ध पानी में टीडीएस की मात्रा 68 रही।
ईएसआइ डिस्पेंसरी में स्थिति बेहतर
पांच नंबर स्थित ईएसआइ डिस्पेंसरी नंबर तीन में पानी की गुणवत्ता के मामले में स्थिति बेहतर मिली। यहीं ईएसआइ हेल्थ केयर विभाग की सिविल सर्जन डॉ. पूजा भारद्वाज का कार्यालय भी है। ईएसआइ डिस्पेंसरी में प्रतिदिन अलग-अलग बीमारियों के लगभग 200 मरीज आते हैं। यहां मरीजों और स्टाफ के लिए एक जैसा पानी उपलब्ध है यहां उपलब्ध पानी में टीडीएस की मात्रा 56 थी।
हम नियमित रूप से महीने में दो बार पानी की जांच करवाते हैं। हमारे यहां मरीजों, स्वजन और सटाफ के लिए गुणवत्ता से परिपूर्ण पानी उपलब्ध है।
-डॉ. पूजा भारद्वाज, सिविल सर्जन, ईएसआइ हेल्थ केयर विभाग।हम पानी की समय-समय पर जांच करवाते हैं। अब फिर से ईएसआइसी अस्पताल में पानी में टीडीएस की जांच करवा लेते हैं। कमी मिली तो सुधार करवाया जाएगा।
-डॉ. कालीदास दत्तात्रेय चव्हाण, डीन, ईएसआइसी मेडिकल कालेज।पानी में अगर टीडीएस की मात्रा सामान्य है तो ठीक है। अगर सामान्य से अधिक है तो सेहत के हिसाब से ठीक नहीं है। पेट संबंधी बीमारियों की आशंका रहती है। पेट संक्रमण भी हो सकता है। किडनी को भी नुकसान पहुंंच सकता है। इसलिए शुद्ध पानी पीना ही बेहतर है।
-डॉ. बीडी पाठक, पेट रोग विशेषज्ञ व सर्जन, फोर्टिस अस्पताल।NEWS SOURCE Credit :jagran
