
मंदिरों में लोग अपने सामर्थ के हिसाब दान- पुण्य करते हैं। इसके अलावा मंदिरों में रोजाना रुपए चढावा भी चढ़ता है। चढ़ावे से जुड़ा उत्तर प्रदेश के राम मंदिर का मामला का इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले के चर्चा में आने के बाद लोगों में मन में यह सवाल उठना लाजमी है मंदिरों में चढ़ने वाला दान कहां जाता है और इसे कहां पर खर्च किया जाता है?
कौन संभालता है मंदिरों की व्यवस्था और कानून?
भारत में मंदिरों के संचालन और उनके वित्तीय प्रबंधन के लिए कोई एक केंद्रीय कानून नहीं है। दक्षिण भारत के कुछ बड़े मंदिरों में प्रशासनिक नियंत्रण राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए खास कानूनों के तहत होता है। इसके अलावा कुछ मंदिरों के अपने पंजीकृत ट्रस्ट होते हैं। मंदिर में चढ़ने वाले चढ़ावे का रखरखाव इन्हीं के द्वारा किया जाता है।
कैसे रखा जाता है चढ़ावे का हिसाब-किताब?
मंदिर में मौजूद दानपात्रों को सुरक्षाबलों या फिर सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में खोला जाता है। इसके बाद रकम गिनने के बाद इसे मंदिर के आधिकारिक बैंक खाते में जमा करवाया जाता है। सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों का रिकॉर्ड अलग से तैयार किया जाता है।
कहाँ खर्च होता है दान का पैसा?
मीडिया रिपोर्ट्स और मंदिर नियमावलियों के इसका उपयोग रोजाना पूजा- पाठ, उत्सवों के आयोजन और मंदिर परिसर का रखरखाव में किया जाता है। इसके अलावा मंदिर में काम करने वाले पुजारियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों को वेतन देने के लिए इसका उपयोग होता है। इस पैसे मुफ्त भोजन, रहने की सुविधा और चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाती है।
क्या सरकार के पास है कुल दान का कोई केंद्रीय रिकॉर्ड?
हैरान करने वाली बात यह है कि देश के सभी मंदिरों में आने वाले कुल चंदे का कोई Centralized डेटा मौजूद नहीं है। साल 2022 में RTI के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के अनुसार देश के मंदिरों की कुल संपत्ति और चढ़ावे का कोई रिकॉर्ड अवेलेबल नहीं था। कई राज्यों ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।
NEWS SOURCE Credit :punjabkesari
