
नोएडा: नोएडा में सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल में भर्ती मरीज और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आपात स्थिति से बचाने के लिए रैंप डिजाइन व तकनीकी पहलू के लिए प्रबंधन को 28 लाख का अतिरिक्त बजट नहीं मिलेगा। शासन ने रैंप निर्माण के दौरान एजेंसी को अलग से धनराशि देने से साफ मना कर दिया है। लखनऊ के उच्च अधिकारियों ने डिजाइन, तकनीकी पहलू और निर्माण की राशि एक साथ देने की बात कही है।
सरकार से की थी 28 लाख रुपये की मांग
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने पिछले दिनों शासन को पत्र लिखकर रैंप निर्माण के लिए आईआईटी रुड़की से डिजाइन और तकनीकी पहलुओं की जांच के लिए 28 लाख रुपये की मांग की थी, जिसे शासन ने रोक दिया है। अब अस्पताल प्रबंधन शासन के निर्देश पर डिजाइन बनाने वाली एजेंसी और निर्माण एजेंसी से संपर्क करेगा। इसके बाद निर्माण कार्य के लिए एस्टीमेटम तैयार होगा, जिसमें लंबा समय लग सकता है। सीएमएस ने शासन का जवाब मिलने के बाद उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को पत्र भेजकर रैंप निर्माण से जुड़े पूरे ब्यौरे पर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। सीएमस डा. अशोक कुमार झा का कहना है कि यूपी राजकीय निर्माण निगम का पत्र मिलने पर ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा।
तीमारदारों को लगा रहता है डर
बता दें कि सेक्टर-39 में जिला अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय के लिए करीब 800 करोड़ रुपये में आठ मंजिला बिल्डिंग तैयार की है। इमरजेंसी यूनिट को छोड़कर हर तल पर मरीज या अधिकारियों के जाने के लिए लिफ्ट या फिर सीढ़ियां ही हैं। ऐसे में 240 बेड के अस्पताल में रैंप नहीं बनने से आपात स्थिति में मरीज व उनके तीमारदारों को डर लगा रहता है। प्राधिकरण ने भवन बनाने के बाद दो पहले ही बिल्डिंग को जिला अस्पताल प्रबंधन को हस्तांतरित कर चुका है। ऐसे में यदि कभी कोई हादसा या घटना होती है तो सभी के पास सीढियां ही सहारा होंगी, क्योंकि लिफ्ट को आग लगने के समय बंद कर दिया जाता है।
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