
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल शुक्रवार देर शाम करीब साढ़े सात बजे भले ही समाप्त हो गई, लेकिन समझौते की मेज सजने से पहले के 45 घंटों ने पूरे प्रदेश को गहरे संकट में झोंक दिया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बीच पंचकूला स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हुई दूसरे दौर की वार्ता के बाद हड़ताल वापसी का एलान हुआ, मगर तब तक लाखों परिवारों की दिनचर्या पटरी से उतर चुकी थी। दावे के अनुसार अकेले उद्योग जगत को इस दौरान 10 हजार करोड़ रुपये का फटका लगा है। बुधवार रात से शुरू हुआ यह संकट शुक्रवार शाम तक चरम पर पहुंच गया था। दर्जनों शहरों और सैकड़ों गांवों में बिजली के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति ठप रही।
इनवर्टर व मोबाइल डिस्चार्ज हो गए और आवश्यक सेवाओं का पहिया पूरी तरह थम गया। अस्पतालों में गंभीर मरीजों की सर्जरी टालनी पड़ी, तो हिसार व फरीदाबाद में आक्रोशित जनता ने सड़कों पर उतरकर मंत्रियों-विधायकों के आवास घेरे। भले ही अब बिजली बहाली शुरू हो गई है, लेकिन इन 40 घंटों में आम आदमी ने जो बेबसी झेली, उसने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।
कारोबार पर चोट
ई-वे बिलिंग अटकी, फैक्ट्रियों में पसरा सन्नाटा भिवानी, पानीपत और यमुनानगर के औद्योगिक क्षेत्रों में 36 घंटे से बिजली न मिलने से उत्पादन पूरी तरह ठप रहा। भिवानी में फैक्ट्रियां बंद होने से प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों की ओर लौटने लगे। यमुनानगर की प्लाईवुड व मेटल इंडस्ट्री में त्योहारी सीजन के आर्ड
कहीं 900 रु. घंटे में मिला जनरेटर, कहीं फेरी लगाकर काटा चारा
बिजली गुल रहने से बूस्टिंग स्टेशन और सरकारी ट्यूबवेल बंद रहे, जिससे पूरे प्रदेश में पानी के लिए हाहाकार मच गया। जींद में लोग 800 से 900 रुपये प्रति घंटे के किराये पर जनरेटर मंगवाकर टंकियां भरने को विवश हुए। नए बस स्टैंड पर पानी खत्म होने के कारण यात्रियों को बोतलबंद पानी खरीदना पड़ा। पानीपत के ग्रामीण इलाकों में अनूठा नजारा दिखा; फल-सब्जी की तरह ट्रैक्टर पर जनरेटर बांधकर फेरी वाले घूमे । हजारों लीटर डीजल फूंका अल्ट्रासाउंड ठप रहे बिजली संकट की सबसे बड़ी मार स्वास्थ्य तंत्र पर पड़ी। कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में 24 घंटे में जनरेटर चलाने के लिए 1000 लीटर से अधिक डीजल (करीब 1 लाख रुपये) खर्च हुआ।
इसके बावजूद लिफ्ट बंद रही, सीटी स्कैन-एमआरआइ बाधित हुए और अल्ट्रासाउंड मशीनें बंद रहने से 100 से अधिक मरीजों को बिना जांच लौटना पड़ा। विद्यार्थी अस्पताल परिसर में लैपटाप लेकर पढ़ाई करते और लोग मोबाइल चार्ज करते दिखे। अटक गए। झज्जर व हिसार में दवा होलसेलरों के कंप्यूटर-प्रिंटर बंद रहने से ई-वे बिल और चालान नहीं कट सके, जिससे दवाइयों की सप्लाई रुक गई। पेट्रोल पंपों पर जनरेटर चलाकर ईंधन की आपूर्ति की गई।
NEWS SOURCE Credit :jagran
