अगरतला : कोविड-19 की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए त्रिपुरा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से 18 सितंबर तक पूरी स्थिति और चिकित्सा सुविधाओं के बारे में विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी और जस्टिस सुभाशीश तालपात्रा की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से आठ बिंदुओं पर उत्तर सौंपने के लिए कहा है। इन बिंदुओं में कोरोना वायरस रोगियों का इलाज कर रहे विभिन्न सरकारी अस्पतालों को आवंटित कोष का ब्योरा भी शामिल है।

खंडपीठ ने कहा, ‘हम निश्चिंत हैं कि सरकार प्रिंट मीडिया द्वारा जताई गई सामान्य जन की चिंताओं का समाधान करेगी। सरकारी चिकित्सा केंद्रों में स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।’राज्य में कोरोना वायरस मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। अखबारों में आई हाल की रिपोर्ट में वायरस के लिए जांच में पॉजिटिव पाए गए रोगियों और उनके रिश्तेदारों की दुर्दशा की जानकारी सामने आई है। स्वास्थ्य केंद्रों में कुछ कमियों को भी उजागर किया गया है।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री की मीडिया पर की गई टिप्पणी वायरल
कोरोना महामारी को लेकर मीडिया पर भ्रम फैलाने संबंधी त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब की टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। पत्रकारों और इससे जुड़े संगठनों ने उनके बयान पर चिंता जताई है। कहा कि यह राज्य में मीडिया को गुलाम बनाने की कोशिश है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सबरूम जिले में विशेष आíथक क्षेत्र की आधारशिला रखी थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि कुछ समाचार पत्र कोरोना को लेकर लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वह उन्हें माफ नहीं करेंगे। साथ में यह भी कहा था कि मैं जो भी कहता हूं, करता हूं। इतिहास इसका गवाह है। मुख्यमंत्री के इस बयान पर फोरम फॉर प्रोटेक्शन ऑफ मीडिया एंड जर्नलिस्ट ने शनिवार को प्रतिक्रिया दी। कहा कि मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद पत्रकार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं देब के मीडिया सलाहकार संजॉय कुमार मिश्रा ने कहा कि मुख्यंमत्री की टिप्पणी को सही संदर्भ में नहीं देखा गया है। इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
