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Home » आज सिविल कोर्ट में मामले की सुनवाई , अयोध्या के बाद अब मथुरा में ‘धर्म’युद्ध

आज सिविल कोर्ट में मामले की सुनवाई , अयोध्या के बाद अब मथुरा में ‘धर्म’युद्ध

faridabadnews24By faridabadnews24September 28, 2020No Comments8 Mins Read

मथुरा: मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े सिविल मुकदमे पर आज कोर्ट में सुनवाई होगी. हिंदू पक्ष ने मंदिर परिसर की 13.37 एकड़ जमीन पर अपना मालिकाना हक मांगा है. याचिका में 1968 के समझौते को ग़लत बताया गया है. साथ ही मंदिर परिसर पर कब्जा कर अवैध तरीके से खड़ी की गई शाही ईदगाह मस्जिद  को हटाने की मांग भी की गई है.

अयोध्या के बाद मथुरा पर धर्मयुद्ध?
देश के 100 करोड़ हिंदुओं के लिए मथुरा-वृंदावन बड़े तीर्थ हैं. ये धरती दुनिया को गीता ज्ञान देने वाले भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है. लेकिन अयोध्या विवाद सुलझने के बाद अब धार्मिक विवाद का सबसे बड़ा केंद्र बनती जा रही है. अयोध्या में हिंदू और मुस्लिम मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्ता से सदियों पुराना संघर्ष सुलझा चुके हैं. मुगल शासकों ने 500 साल पहले जिस राम मंदिर को तोड़ा गया था, उसका निर्माण शुरु हो चुका है. अब रामलला के बाद श्रीकृष्ण विराजमान भी कोर्ट पहुंच चुके हैं. अयोध्या के बाद अब मथुरा पर  ‘धर्म’युद्ध शुरु हो चुका है?

औरंगजेब ने तुड़वा दिया था मंदिर
मथुरा की कोर्ट में दायर हुए केस में श्रीकृष्ण मंदिर परिसर की 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक मांगा गया है. इसके साथ ही मंदिर स्थल से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की अपील की गई है. कहा जाता है कि मुगल शासन औरंगजेब ने 1669 में श्रीकृष्ण मंदिर की भव्यता से चिढ़कर उसे तुड़वा दिया था और इसके एक हिस्से में  ईदगाह का निर्माण कराया गया था. इसी ईदगाह को हटाने के लिए कोर्ट में वक़ील विष्णु जैन और रंजना अग्निहोत्री ने कोर्ट में केस दाखिल किया है.

श्रीकृष्ण जन्मभूमि तोड़कर बनवाई गई शाही ईदगाह मस्जिद
याचिका में कहा गया है कि जहां पर औरंगजेब ने शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया.उसी जगह पर कंस की कारागार थी और वहीं पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. हिंदू पक्ष का दावा है कि उसी कारागार की जमीन पर बाद में श्रीकृष्ण का प्राचीन मंदिर बनवाया गया था. जिसे औरंगजेब ने तुड़वा दिया और वहां पर शाही ईदगाह मस्ज़िद का निर्माण करवाया. मथुरा की कोर्ट आज इस मामले की सुनवाई कर सकती है. कोर्ट के रूख से साफ होगा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला आगे बढ़ेगा या नहीं.

अयोध्या के बाद अब मथुरा पर ‘धर्म’युद्ध?
हिंदू पक्ष का दावा है कि भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मस्थान उसी ढांचे के नीचे स्थित है, जहां पर प्राचीन केशवराय मंदिर हुआ करता था.दावा ये भी किया जाता है कि 1935 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के हिंदू राजा को मथुरा की विवादित ज़मीन के अधिकार सौंप दिए थे. इसके बाद 1951 में श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट बनाकर तय हुआ था कि यहां दोबारा भव्य मंदिर का निर्माण होगा. वर्ष 1958 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ नाम की संस्था का गठन हुआ, जिसने मुस्लिम पक्ष से समझौता कर लिया.

पूरे परिसर को श्रीकृष्ण जन्मस्थान घोषित करने की मांग
श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए दाखिल नई याचिका में इस समझौते को ग़लत बताया गया है और पूरे परिसर को श्रीकृष्ण जन्मस्थान घोषित करने की मांग की गई है. लेकिन सवाल ये है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर जो विवाद है. उसे सांप्रदायिक विवाद बनाए बिना क्या गंगा जमुनी फॉर्मूले से नहीं सुलझाया जा सकता ? यदि इतिहास में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कट्टरवाद का अतिक्रमण हुआ है तो हिंदू और मुस्लिम मिलकर उसे क्यों नहीं हटा सकते?

याचिका में क्या कहा गया है?
– भगवान श्रीकृष्ण का मूल जन्म स्थान कंस का कारागार था
– कंस का कारागार (श्रीकृष्ण जन्मस्थान) ईदगाह के नीचे है
– भगवान श्री कृष्ण की भूमि सभी हिंदू भक्तों के लिये पवित्र है
– विवादित ज़मीन को लेकर 1968 में हुआ समझौता ग़लत था
– कटरा केशवदेव की पूरी 13.37 एकड़ जमीन हिंदुओं की थी

भगवान श्रीकृष्ण का वनवास कब खत्म होगा?
भगवान राम का वनवास त्रेतायुग में 14 वर्षों में ख़त्म हुआ और कलियुग में श्रीराम को अवध पहुंचने में करीब 500 साल लग गए. जिसके पीछे अदालती लड़ाई तो एक वजह थी ही, सियासत भी बहुत बड़ा कारण रहा. भगवान कृष्ण के जन्मभूमि का मामला अदालत में पहुंचा ही है और फिर सियासत शुरु हो चुकी है. क्या ऐसा कोई रास्ता नहीं जिससे भगवान कृष्ण की जन्मभूमि को मुक्त कराया जा सके.

गंगा-जमुनी फॉर्मूले से मुक्त होगी कृष्ण जन्मभूमि?
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर धार्मिक अतिक्रमण के ख़िलाफ़ केस को लेकर सबसे बड़ी रुकावट Place of worship Act 1991 भी है. वर्ष 1991 में नरसिम्हा राव सरकार में पास हुए  Place of worship Act 1991 में कहा गया है कि 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के समय धार्मिक स्थलों का जो स्वरूप था,  उसे बदला नहीं जा सकता. यानी 15 अगस्त 1947 के दिन जिस धार्मिक स्थल पर जिस संप्रदाय का अधिकार था, आगे भी उसी का रहेगा. इस एक्ट से अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि को अलग रखा गया था. लेकिन सवाल ये है कि जो विवाद लोकतांत्रिक तरीके से सुलझाया जा सकता है. जिस मामले की ऐतिहासिक गलतियों को दूर करके हिंदू और मुस्लिम दुनिया को भाईचारे की मिसाल दे सकते हैं तो उस मामले में 1992 वाली धमकी क्यों दी जा रही है.

ओवैसी और विनय कटियार भी विवाद में कूदे
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर सियासी संग्राम का ट्रेलर भी आ चुका है. मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति करने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट करके कहा है कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के मुताबिक, किसी भी पूजा के स्थल के परिवर्तन पर मनाही है. शाही ईदगाह ट्र्रस्ट और श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ने इस विवाद का निपटारा साल 1968 में ही कर लिया था तो इसे अब फिर से जीवित क्यों किया जा रहा है? वहीं श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के अगुवा और बीजेपी के फायरब्रांड नेता विनय कटियार ने कहा है कि अब श्री कृष्ण जन्म भूमि आंदोलन शुरु करना होगा.

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का ही महत्व
मामले में याचिकाकर्ता एडवोकेट रंजना अग्निहोत्री का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का ही महत्व है. लेकिन जन्मभूमि का अतिक्रमण करके वहां ईदगाह मस्जिद बना दी गई. उसे हटाया जाए और जो मूल स्थान है भगवान श्रीकृष्ण का, वो भगवान श्रीकृष्ण विराजमान को दिया जाए. बड़ा सवाल ये है कि क्या अयोध्या से सबक लेकर मथुरा में हल निकल सकता है? क्या श्रीराम जन्मभूमि के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर आंदोलन शुरू होगा? क्या अयोध्या के बाद अब मथुरा पर ‘धर्म’युद्ध होगा?

आस्था की लड़ाई हर बार अदालत में क्यों आ जाती है?
बड़ी बात ये है कि आस्था की लड़ाई हर बार अदालत में क्यों आ जाती है? देश के सियासी लोग राम और कृष्ण को सियासत का मुद्दा क्यों बना लेते हैं. श्रीकृष्ण देश के 100 करोड़ हिंदुओं के आराध्य हैं. श्रीकृष्ण भारत के धर्म, आध्यात्म और संस्कृति की पहचान हैं और और भारत को कर्म का उपदेश देने वाले श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर हज़ारों सालों में कई हमले हुए हैं. पवित्र श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मंदिर 3 बार तोड़ा गया और 3 बार बनाया गया.

मुस्लिम शासकों ने मंदिर तोड़कर सोना लूटा
मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जहां जन्म हुआ था. उसी जगह पर उनके प्रपौत्र बज्रनाभ ने श्रीकृष्ण को कुलदेवता मानते हुए मंदिर बनवाया. सदियों बाद महान सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने वहां भव्य मंदिर बनवाया. उस मंदिर को मुस्लिम लुटेरे महमूद गजनवी ने साल 1017 में आक्रमण करके तोड़ा और मंदिर में मौजूद कई टन सोना ले गया. इसके बाद साल 1150 में राजा विजयपाल देव के शासनकाल में एक भव्य मंदिर बनवाया गया. इस मंदिर को 16वीं शताब्दी की शुरुआत में सिकंदर लोदी के शासन काल में नष्ट कर डाला गया. इसके 125 साल बाद जहांगीर के शासनकाल में ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला ने उसी जगह श्रीकृष्ण के भव्य मंदिर का निर्माण कराया. श्रीकृष्ण मंदिर की भव्यता से बुरी तरह चिढ़े औरंगजेब ने 1669 में मंदिर तुड़वा दिया और मंदिर के एक हिस्से के ऊपर ही ईदगाह का निर्माण करा दिया.

इतिहास का सबसे क्रूर शासक था औरंगजेब
इतिहास में औरंगजेब को भारत का सबसे क्रूर और कट्टरपंथी शासक माना जाता है. उसके आदेश पर भारत में सैकड़ो हिंदू मंदिर तोड़े गए. काशी विश्वनाथ मंदिर तोड़ने के लिए औरंगजेब का दिया हुआ आदेश आज भी सुरक्षित है और हिंदू पक्ष के मुताबिक मथुरा में औरंगजेब ने कृष्ण मंदिर तोड़कर जो शाही ईदगाह मस्जिद बनावाई. उसके खिलाफ भी कई सबूत मौजूद हैं. लेकिन मथुरा को लेकर मुस्लिमों के मन की बात क्या है ?

मथुरा पर क्या है मुसलमानों के ‘मन की बात’ ?
इस्लाम कहता है ..कि दूसरे धर्म के पूजास्थलों पर मस्जिदें नहीं बनवाई जा सकती. इस्लाम कहता है कि दूसरे धर्मस्थलों की ज़मीन क़ब्जा नहीं की जा सकती. इस्लाम दूसरे धर्मों का सम्मान सिखाता है. ऐसे में क्रूर औऱ कट्टरपंथी औरंगजेब ने अगर इस्लाम के ख़िलाफ़ जाकर भारत में ऐतिहासिक ग़लतियां कीं तो हिंदू और मुस्लिम मिलकर उन गलतियों को सुधार क्यों नहीं सकते. बाबरी ढांचा मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी कहते हैं कि हमारा यही मक़सद है कि हिंदू मुसलमान मिल कर रहें. लेकिन कुछ पार्टियों के चंद लोग हैं, जो चाहते हैं कि हिंदुस्तान में मंदिर-मस्जिद का विवाद हमेशा बरकरार रहे और इससे उनकी रोजी-रोटी चलती रहे.

after Ayodhya Faridabad News faridabadnews24 Hearing of the case in civil court today now 'religious' war in Mathura
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