फरीदाबाद : प्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना मीनू ठाकुर ने कहा कि नृत्य उनके लिए साधना है, पूजा है और नृत्य के माध्यम से ही अपने ईष्टदेव भगवान श्रीकृष्ण से मिलाप करने का मौका मिलता है। देश-विदेश में अपनी नृत्य प्रस्तुति से वाहवाही लूट चुकी मीनू ठाकुर ने कहा कि उन्होंने 9 साल की उम्र में रुचि के रूप में नृत्य को चुना था, पर कब इस में रमती चली गई और यह उनका प्रोफेशन बन गया, उन्हें खुद नहीं पता।
मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से ताल्लुक रखने वाली मीनू ठाकुर यहां रेडियो महारानी में आयोजित एक कार्यक्रम में आई थी। दैनिक जागरण से खास बातचीत में नृत्यांगना मीनू ने कहा कि यह ठीक है कि आज की पीढ़ी को पाश्चात्य नृत्य, गीत-संगीत में ज्यादा रुचि है, इसमें कोई बुराई भी नहीं है, पर युवाओं को यह कहना चाहूंगी कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को न भूलें। भारतीय संगीत हमारी पहचान है।
राष्ट्रीय नृत्य रत्न, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी अवार्ड, वर्ष 2019 में उत्कृष्ट नृत्य के लिए रुद्राक्षम अवार्ड हासिल करने सहित ढेरों अवार्ड व पुरस्कार अपने नाम कर चुकी मीनू ठाकुर को गत वर्ष कुचिपुड़ी नृत्य में अमूल्य योगदान के लिए सरोजनी नायडू इंटरनेशनल अवार्ड फॉर वूमेन अवार्ड से भी नवाजा गया। मीनू ठाकुर कहती हैं कि हर अवार्ड व पुरस्कार का अलग महत्व है और जिस भी कलाकार की प्रतिभा को सराहा जाता है और पुरस्कृत-विभूषित किया जाता है, उससे उन्हें अपने क्षेत्र में और अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है। यही वजह है कि अब भी अपनी संस्था सुरमया के माध्यम से जहां बच्चों को सिखा रही हैं, वहीं खुद भी नया सीखने पर पूरा ध्यान देती हैं और आज भी चार से छह घंटे रियाज के लिए निकाल लेती हैं। मीनू देश की उन चुनिदा नृत्यांगनाओं में से एक हैं जिन्हें, कुचिपुड़ी नृत्य की एक विधा सिम्हानंदिनी करने में महारत हासिल है। मीनू कहती हैं कि यह सब गुरुओं के आशीर्वाद और निरंतर अभ्यास से संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि वो पल कभी नहीं भूलती जब यूरोपीय टूर में एक कार्यक्रम के दौरान दर्शक भाव विभोर हो गए और दर्शकों ने अपनी हथेलियों पर और बांह पर उनके आटोग्राफ लिए थे।