देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के बढ़ते दामों को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा है। हालांकि, ईधन पर यह बढ़ोतरी सिर्फ पिछले कुछ महीनों ही बात नहीं है। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए के सत्ता में आने के बाद से ही एलपीजी के दाम लगातार बढ़े हैं। आलम यह है कि पिछले सात सालों में गैस सिलेंडर की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। वहीं इस दौरान एलपीजी की बढ़ती कीमतों से सब्सिडी लगभग न के बराबर पहुंच गई है।
कितनी हुई एलपीजी के दाम में बढ़ोतरी: लोकसभा में तेल और एलपीजी के दामों में हुई बढ़ोतरी को लेकर पूछे गए सवालों पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लिखित जवाब दिए हैं। इसके मुताबिक, 1 मार्च 2014 को एक एलपीजी सिलेंडर की कीमत 410.50 रुपए थी। हालांकि, इस महीने की बात की जाए, तो दिल्ली में ही एक सिलेंडर के दाम 819 रुपए तक पहुंच चुके हैं। यानी पिछले सात सालों में एलपीजी की कीमतें दोगुनी हो गई हैं।
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एक्साइज ड्यूटी से बढ़ी केंद्र की कमाई:
बता दें कि पेट्रोल पर फिलहाल 32.90 रुपए और डीजल पर 31.80 रुपए प्रति लीटर की दर से एक्साइज ड्यूटी लगाई जा रही है। 2013 में यह एक्साइज ड्यूटी पेट्रोल पर 17.98 रुपए और डीजल पर 13.83 रुपए थी। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल, प्राकृतिक गैसों और कच्चे तेल से सरकार का कुल एक्साइज कलेक्शन 2016-17 के 2.37 लाख करोड़ से बढ़कर अप्रैल-जनवरी 2020-21 में 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
