खेल विभाग की ओर से खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर पर सी और डी ग्रेड के ग्रेडेशन सर्टिफिकेट बनाकर दिए जाते हैं। डी ग्रुप की भर्ती के बाद ग्रेडेशन सर्टिफिकेट बनाना खेल विभाग की गले की फांस बन चुका है। इस भर्ती में खेल कोटा के तहत नौकरी ना मिलने के कारण युवकों ने कोर्ट में केस कर दिया था। उसके बाद जो खिलाड़ी इसके तहत लगे थे विभाग ने दोबारा से उनकी जांच करवाई थी।
कैथल जिला खेल विभाग की ओर से अब बिना वेरिफिकेशन करवाए कोई भी सर्टिफिकेट बनाकर नहीं दिया जा रहा है। पहले खेल एसोसिएशन की ओर से जारी पत्र के आधार पर सर्टिफिकेट बन जाता था। अब एसोसिएशन के अलावा खेल मुख्यालय को भी जांच के लिए लिखा जा रहा है। जिले में विभिन्न खेलों के सी ग्रेड के 15 और डी ग्रेड के 319 सर्टिफिकेट बने हुए हैं। जिला खेल विभाग की ओर से इन सभी सर्टिफिकेटों की दोबारा से जांच करवाई जाएगी। वेरिफिकेशन के लिए विभाग ने संबंधित खेलों की एसोसिएशनों और खेल विभाग को पत्र भेजना शुरू कर दिया है। कुछ दिन पहले ही फर्जीवाड़ा पाए जाने पर विभाग ने कराटे के 21 सर्टिफिकेट रद कर दिए थे।
इन खेलों में है परेशानी
खेल एसोसिएशन और खेल विभाग के बीच फंसकर खिलाड़ियों का नुकसान हो रहा है। कुछ दिन पहले भी सर्कल कबड्डी के खिलाड़ियों ने ग्रेडेशन ना बनने के कारण रोष व्यक्त किया था। बता दें कि कराटे, सर्कल कबड्डी, चैस, थ्रो-बाल, ताईक्वांडो और खो-खो खेल के खिलाड़ियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
ये हैं सर्टिफिकेट के फायदे
खिलाड़ियों के लिए इस सर्टिफिकेट के बहुत फायदे होते हैं। जो खिलाड़ी किसी भी कालेज में स्पोर्ट्स कोटा में दाखिला लेना चाहता है, इसके लिए यह सर्टिफिकेट बहुत जरूरी है। सरकारी नौकरियों में भी स्पोर्ट्स कोटा होता है। उसमें आवेदन करने के लिए भी खिलाड़ी के पास भर्ती की श्रेणी के हिसाब से ए, बी, सी या डी सर्टिफिकेट होना जरूरी है। सरकार की ओर से भी इन्हें विभिन्न प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं। जिला खेल अधिकारी सतविंद्र गिल ने बताया कि जिले भर में जितने भी ग्रेडेशन सर्टिफिकेट बने हुए हैं उनकी जांच करवाई जा रही है। अगर जांच के दौरान कोई भी सर्टिफिकेट गलत पाया जाता है तो उसे रद्द कर दिया जाएगा।
