अब सरकार दिल्ली-एनसीआर से लगते हरियाणा के जिलों में सरकार इलेक्ट्रीक बसें चलाएगी। वहीं बसों को चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। वहीं परिवहन विभाग ने अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि अपने आस पास- जगह देखें कि वह कहां पर चार्जिंग स्टेशन लगा सकते हैं।प्रदेश में पहली बार बिजली से चलने वाली 124 बसें सड़क पर दौड़ाइ जाएगी, जिसके बाद संख्या बढ़ाने पर परिवहन विभाग विचार करेगा। अधिकारियों का कहना है बिजली वाली बसें चलने के बाद प्रदूषण से काफी हद तक छुटकारा मिलने के साथ ही सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
पिछले दिनों फरीदाबाद में 10 सिटी बसों का परिचालन कर इसकी शुरूआत की गई है। इसके अलावा सरकार ने वर्ष 2021-22 में बीएस-6 उत्सर्जन मानदंडों को पूरा करने वाली 800 मानक गैर-एसी बसों की खरीदने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। साथ ही किलोमीटर स्कीम के तहत किराए पर ली गई 536 बसों का संचालन भी शुरू कर दिया गया है। इस तरह जल्द हरियाणा रोडवेज के बेड़े में बसों की कुल संख्या 5,000 से अधिक हो जाएगी, जिससे लोगों को सफर करने में आसानी होगी। प्रदेश में 54 वोल्वो मर्सिडीज सुपर लग्जरी एसी बसें, 18 सुपर लग्जरी एसी मल्टी-एक्सल बसों का संचालन भी किया जा रहा है।
परिवहन मंत्री ने बताया इलेक्ट्रॉनिक बसों को चलाने के लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन भी होने चाहिए। इसके लिए परिवहन विभाग के अधिकारियों से उक्त पांचों जिलों में संभावित स्थानों को तलाशने का आदेश दिया गया है जहां चार्जिंग स्टेशन बनाए जा सकते हैं। परिवहन मंत्री का कहना है कि एक बार चार्ज होने पर बसें करीब 150 से 200 किलोमीटर तक सफर आसानी से कर सकती हैं। इस बात को ध्यान में रख जगह की तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया वर्ष 2024 तक पांचों जिलों में इलेक्ट्रॉनिक बसें दौड़ने लगेंगी। प्रदेश के परिवहन एवं खनन मंत्री मूलचंद शर्मा ने बताया कि पहले चरण में देश की राजधानी दिल्ली से लगते हरियाणा के जिले फरीदाबाद, गुड़गांव, सोनीपत, पानीपत और सीएम सिटी करनाल में इलेक्ट्रॉनिक बसों को चलाने की योजना है। उनका कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक बसों के चलने से पर्यावरण प्रदूषण में तेजी से कमी आएगी। साथ ही सार्वजनिक परिवहन प्रणाली और मजबूत होगी। परिवहन मंत्री का कहना है कि इलेक्ट्रानिक बसों का परिचालन शुरू होने से सबसे अधिक फायदा शहर को प्रदूषण से होगा। उन्होंने कहा बस में सफर करने के दौरान अक्सर महिलाओं और बच्चों को चक्कर या उल्टी आने की शिकायत रहती है। इसके अलावा साथ वाली सवारियों या फिर सड़क पर चल रहे अन्य लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। यह सब डीजल और पेट्रोल से उठने वाले धुएं और उसकी गंध की वजह से होता है। साथ ही डीजल की गाड़ियां प्रदूषण भी बहुत अधिक करती हैं। इलेक्ट्रिक बसें इसका सबसे बेहतर विकल्प हैं। परिवहन मंत्री ने कहा दिल्ली-एनसीआर के शहरों में फरीदाबाद और गुड़गांव ऐसे शहर हैं जहां की आबोहवा सबसे अधिक खराब रहती है। इन शहरों को एक्यूआई पीएम 2.5 का स्तर 500 से अधिक पहुंच जाता है। ऐसे में इन दोनों शहरों में अधिक से अधिक इलेक्ट्रानिक बसें दौड़ाई जाएंगी। हाल ही में एक संस्था की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में 22 शहर भारत के हैं। इनमें दिल्ली के साथ एनसीआर के कई शहर शामिल हैं। फरीदाबाद 11वें स्थान पर है। जबकि गुड़गांव 24 वें स्थान पर है। इसके अलावा गाजियाबाद दूसरे, नोएडा छठे व ग्रेटर नोएडा 7वें स्थान पर है।
