पीजीआई में पहली बार कोरोना से एक डॉक्टर की मौत हो गई। मृतक के परिजनों का आरोप है कि संस्थान में खुद के डॉक्टर के लिए ही ऑक्सीजन मास्क तक नहीं मिला। इस कारण डॉ. दयाशंकर लाल श्रीवास्तव ने रविवार रात कोरोना संक्रमण के चलते दम ताेड़ दिया। उधर, पीजीआई प्रबंधन की ओर से इस मामले पर कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। परिजनों के आरोप के बाद जब पीजीआई की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. पुष्पा दहिया से संपर्क किया तो उनसे बात नहीं हो पाई।
पंडित बीडी शर्मा हेल्थ साइंस विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी एंड मॉलीक्यूलर साइंस विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. दयाशंकर श्रीवास्तव को मेडिकल क्षेत्र में योगदान के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने डीएनए टेस्टिंग के जरिए बीटा थैलेसीमिया का पता लगाने की जांच आसान कर दी थी। उनका मकसद था कि परिवार में अन्य सदस्यों तक यह अनुवांशिक बीमारी ना पहुंचे। उन्होंने पीजीआईएमएस रोहतक में फैमिली स्क्रीनिंग किए जाने पर भी काम किया, ताकि शादी से पूर्व वर-वधू दोनों के रक्त की जांच करवाकर बीमारी का पता लगा सके। जिससे होने वाली संतान को ऐसा रोग ना हो।
रात 9 बजे अचानक छाती में दर्द उठा, सांस लेने में तकलीफ होने लगी, ट्रामा सेंटर ले जाने के करीब 15 मिनट बाद ही मौत हो गई
रविवार को रात 9 बजे 44 वर्षीय डॉ. दयाशंकर श्रीवास्तव अपने ओल्ड हाउसिंग बोर्ड स्थित आवास पर ही थे। अचानक उनकी छाती में दर्द उठा और सांस लेने में तकलीफ महसूस होने लगी। उन्हें रात को ही ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया। यहां पर उन्हें ऑक्सीजन देने का प्रयास किया गया, लेकिन इससे पहले ही ट्रामा सेंटर आने के मात्र 15 मिनट बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया। मृत्यु के बाद उनका कोरोना टेस्ट करवाया गया। सोमवार को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई और वैश्य श्मशान घाट में कोविड-प्रोटोकॉल के तहत उनका अंतिम संस्कार किया गया।
परिजनों का आरोप, उन्हें मास्क लाने के लिए भेजा मेडिकल मोड़
डॉ. दयाशंकर स्वयं पीजीआईएमएस में डॉक्टर थे। परिजनों ने अफसोस जताते हुए आरोप लगाया कि लेकिन जब उन्हें हालत बिगड़ने पर ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया तो उनके लिए ऑक्सीजन मास्क भी अस्पताल के अंदर नहीं मिला। बल्कि परिजनों से बाहर मेडिकल मोड़ से मंगवाया गया। जब तक वे आक्सीजन मास्क लेकर पहुंचे तब तक डॉक्टर की सांसें थम चुकी थीं।
ये हैं डॉक्टर दयाशंकर की उपलब्धियां जिनके लिए वे याद किए जाएंगे
- हिमोफिलिया, थैलेसिमिया, डीएमडी और जेनेटिक की बीमारियों पर शोध किया है।
- शोध के लिए 25 से ज्यादा आर्टिकल प्रकाशित करवा चुके थे। इनमें से 20 इंपैक्ट फैक्टर में छपे हैं।
- इनका साइटेशन इंडेक्स 1000 तक पहुंच चुका है।
- आठ एमडी स्टूडेंट्स इनके अंतर्गत शोध कार्य कर रहे थे।
news source from : dainikbhaskar
