सरकार व किसानों के बीच पिछले 4 महीने से बंद बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है, क्योंकि किसानों ने बातचीत शुरू करने की पहल करते हुए पी.एम. नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कोरोना महामारी के बीच चल रहे धरने को किसानों की मांग पूरी कर खत्म करवाने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है। हालांकि अभी तक किसी भी तरफ से पहल नहीं होने के कारण बात अटकी हुई थी जो अब किसानों के पत्र के बाद शुरू होने की उम्मीद है। कृषि कानून रद्द करवाने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों को 6 महीने होने वाले हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य बलवीर सिंह राजेवाल, दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हनान मुला, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहा, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव, अभिमन्यु कोहाड़ की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जिस तरह से कोरोना महामारी चल रही है ऐसे में सरकार बातचीत कर किसानों की समस्या का समाधान करे तो वे आराम से अपने घर चले जाएंगे। इसके साथ ही शर्त रखी गई है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द करे और फसलों की खरीद के लिए एम.एस.पी. का कानून बनाए। किसान नेताओं का कहना है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते सरकार को बड़ा दिल कर किसानों की मांगों पर विचार करना चाहिए। इसके साथ ही सरकार से गांवों में संक्रमण को फैलने से रोकने के प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की गई है।
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