फरीदाबाद : [ मिथलेश मिश्रा ] सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अरावली की पहाड़ियों पर अवैध रूप से बसी खोरी कॉलोनी को तोड़ने का आदेश आने के बाद लोगों का पलायन लगातार जारी है। इसी के साथ 35 साल से खोरी जैसा हाल बॉर्डर पर बसी साउथ दिल्ली की लालकुआं सी ब्लॉक चुंगी नंबर दो का भी है। इसे राम प्यारी कैंप भी कहते हैं। यहां रहने वाले हजारों परिवारों में भी अपने मकान तोड़े जाने का डर बना हुआ है। क्योंकि नगर निगम द्वारा यहां भी मुनादी कराई जा रही है। जबकि यहां के लाेगों को कोई नोटिस तक नहीं मिला है। राशन, बिजली पानी सब कुछ दिल्ली का ले रहे हैं। लेकिन अब इन्हें हरियाणा का बताकर उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। खास बात ये है कि इस कॉलोनी में दिल्ली सरकार ने बिजली व पानी की सप्लाई दे रखी है। पूरी कॉलोनी में दिल्ली सरकार ने सीसीटीवी कैमरे लगवाएं हैं। कॉलोनी में जाने के लिए सड़क तक बनी है। फिर अचानक सीमा कैसे बदल गयी इस बात को लेकर लोग परेशान हैं। हैरानी की बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा और दिल्ली सरकार अपनी सीमा का निर्धारण तक नहीं कर पा रही है।
15 जून से काट रखी है बिजली व पानी की सप्लाई
राम प्यारी कैंप में रहने वालों ने बताया कि फरीदाबाद प्रशासन के कहने पर दिल्ली के अधिकारियों ने 15 जून से बिजली पानी की सप्लाई बंद कर दी है। लोग दो किलोमीटर दूर से पानी लाकर किसी तरह काम चला रहे हैं। स्थानीय वासी नइमा कुरैशी, रेशमी खातून, कमलेश देवी, मंजू आदि ने बताया कि वह पिछले 15-20 सालों से यहां रह रही हैं। उन्हें आज भी राशन दिल्ली सरकार की ओर से मिलता है। फिर वह रातोंरात हरियाणा के कैसे हो गए।
पूछा सवाल:
वोट देते हैं दिल्ली में फिर हरियाणा कैसे हाे गया
लालकुंआ सी ब्लॉक चुंगी नंबर दो आरडब्ल्यूए के प्रधान ब्रिज कुमार, अतीका बेगम, शबाना, आदि ने बताया कि उन सभी का वोटर कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड सब कुछ दिल्ली का बना है। वह वोट भी दिल्ली को ही करते हैं। यहां तक कि घरों के मकान नंबर तक दिल्ली के हैं। फिर सुप्रीम कोर्ट का आर्डर आते ही वह हरियाणा के कैसे हो गए। उन्होंने ये भी बताया कि उनकी कॉलाेनी वन विभाग की जमीन पर नहीं बल्कि पर्यटन विभाग की जमीन पर बसी है।
ढाई से तीन हजार मकानों को लेकर असमंजस
इस कॉलोनी में बने करीब 2500 से 3000 मकानों को लेकर हरियाणा और दिल्ली को लेकर असमंजस बना हुआ है। दोनों राज्यों के अधिकारी अपनी अपनी सीमा का निर्धारण तक नहीं कर पा रहे हैं। कभी हरियाणा के कर्मचारी मकानों पर एच लिखकर अपना बताते हैं तो भी कभी दिल्ली के अधिकारी पिलर को निशान मानकर अपना बताते हैं। सही कौन है इसे लेेकर कुछ भी स्प्ष्ट नहीं है। दोनों राज्यों के कर्मचारी अपना अपना डिमार्केशन करने में जुटे हैं। ऐसे में यहां के लाेगों में भी अपना आशियाना उजड़ने का भय बना हुआ है।
दिल्ली सरकार इस कॉलोनी को करने जा रही रेगुलर
स्थानीयवासियों ने बताया कि दिल्ली सरकार इस काॅलोनी को रेगुलर करने जा रही है। इसके लिए लोगों से आवेदन मांगे गए थे। अधिकांश लोगों ने आवेदन कर भी दिया है। लोगों के मोबाइल पर आवेदन के सफलता पूर्वक होने के मैसेज भी आ गए हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश हरियाणा के लिए है दिल्ली के लिए नहीं। साजिश के तहत फरीदाबाद प्रशासन उनके इलाके में मुनादी करा रहा है। लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनके मकानों को जबरन तोड़ा गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
