प्रदेश में पंचायत राज चुनाव में अभी समय लग सकता है। जी हां, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के चलते हरियाणा सरकार द्वारा जानकारी दी गई कि अभी जल्द चुनाव कराने का कोई इरादा नहीं है। ये जानकारी हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल दीपक बालियान ने चीफ जस्टिस की बेंच के सामने दी है।बता दें कि इस मामले में गुरुग्राम जिले के ग्राम जटोला निवासी प्रवीण चौहान द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पंचायत चुनाव में आरक्षण को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने राज्य के पंचायत विभाग द्वारा 15 अप्रैल, 2021 को अधिसूचित हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अधिनियम 2020 को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने के निर्देश देने की मांग रखी है।
अधिनियम में संशोधन के मुताबिक तो पंचायती राज में सीटों का 8 प्रतिशत बीसी-ए श्रेणी हेतु आरक्षित किया जाना है और न्यूनतम सीटें 2 से कम नहीं होनी चाहिए जो एक-दूसरे के विपरीत है। हरियाणा में 8 प्रतिशत के मुताबिक सिर्फ छह जिले हैं जहां 2 सीटें आरक्षण के लिए निकाली जाती है। उधर, 18 जिले में केवल 1 सीट आरक्षित की जानी है, जबकि सरकार ने 15 अप्रैल, 2021 की अधिसूचना के माध्यम से सभी जिलों में बीसी-ए श्रेणी के लिए 2-2 सीटें आरक्षित की हैं। जो कि कानूनन बिल्कुल गलत है। अधिनियम में संशोधन जिला परिषद की जनसंख्या 2021 में बीसी-ए आबादी को बिना दिखाए किया गया है। जबकि बीसी-ए आबादी को दर्शाने वाला एक अलग कॉलम होना चाहिए, ताकि आरक्षण के साथ-साथ रोटेशन भी साफ तौर पर देखा जा सके।
याचिका से मिली जानकारी के मुताबिक पंचायती राज अधिनियम में नया संशोधन किया गया है और पिछड़े वर्गों के आरक्षण के लिए नए प्राविधान भी किए गए थे। लेकिन तथ्यों की सही जांच किए बिना ही जिस तरह से बीसी ए के लिए आठ प्रतिशत का अलग आरक्षण प्रदान किया गया है। यह ठीक नहीं है। साथ ही ड्रॉ और रोटेशन प्रक्रिया का पालन कैसे किया जाए इसका भी स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है। याचिका के अनुसार सरकार की आरक्षण नीति पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक है।
याचिका में ये भी लिखा गया है कि नए प्रावधान तय सिद्धांतों और अदालतों द्वारा पारित फैसले की पर बिना गौर किए बनाए गए हैं। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रवि शंकर झा व जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित बेंच ने सरकार को इस मामले में नोटिस जारी कर जवाब देने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं बल्कि इस पर सरकार ने जल्द चुनाव न करवाने का भी कोर्ट को आश्वासन दें दिया है। साथ ही हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई 20 अगस्त तक स्थगित कर दी है। जिसका सीधा और साफ मतलब है कि तब तक राज्य में पंचायती राज संस्था का कोई चुनाव नहीं होने वाला है।
