
चंडीगढ़ के स्कूल और कालेज में जन्माष्टमी की धूम देखने को मिल रही है। 30 अगस्त को जन्माष्टमी की छुट्टी होने के चलते शनिवार और रविवार को ऑनलाइन सेलीब्रेशन किया जा रहा है। शहर के कालेजों में जहां पर पूजा-पाठ के साथ भजन कीर्तन कर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को मनाया जा रहा है तो वहीं स्कूल में स्टूडेंट्स भगवान श्रीकृष्ण और राधा का रूप में सजकर डांस करते हुए नजर आ रहे हैं।
केबी डीएवी स्कूल सेक्टर-7 में जन्माष्टमी कार्यक्रम के मौके पर स्टूडेंट्स ने विभिन्न प्रकार की वेशभूषा में सजे भगवान श्रीकृष्ण और मीराबाई के भजन पेश किए। वहीं एसडी स्कूल और कालेज सेक्टर-32 जन्माष्टमी पर विशेष पूजा-पाठ, हवन के साथ भजन गायन कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें स्टूडेंट्स के साथ टीचिंग और नान टीचिंग स्टाफ ने हिस्सा लिया। वहीं सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न रूपों के साथ स्टूडेंट्स शामिल हुए। स्टूडेंट्स बांसुरी बजाने से लेकर माखन चोर और श्रीकृष्ण की लिलाओं के विभिन्न दृश्यों को करते हुए नजर आए।
एसडी कालेज सेक्टर-32 के प्रिंसिपल डा. अजय शर्मा ने कहा कि परंपरा से टूटकर कभी भी विकास नहीं होता। परंपरा से स्टूडेंट्स को जोड़ने के लिए जरूरी है कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा समाजिक कार्यक्रमों के साथ जोड़ा जाए ताकि वह उसे समझें और आगे बढ़ने का प्रयास करें। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी ऐसा ही था, जब बच्चे थे तो बचपन की शरारतें की और उसके बाद युवावस्था में पहुंचते-पहुंचते बुराई का नाश किया। जब कुरुक्षेत्र में कौरव और पांडवों का युद्ध हुआ तो कर्म और धर्म का आदेश भी भगवान श्रीकृष्ण ने ही दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म के लिए प्रेरित किया है। इसी प्रकार से जब वह राजा बने तो सुदामा के गरीब होने पर भी उनसे ठीक वैसे ही मिले जैसे बचपन में मिलते थे। उन्होंने जो भी कर्म किए वह आज के समय में सार्थक है। उनसे ज्यादा से ज्यादा प्रेरणा लेने की जरूरत है।
