
हरियाणा विधानसभा सचिवालय ने नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये हड़पने वाले गिरोह को पकड़ कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। सचिवालय के अधिकारियों ने आरोपियों के मंसूबों पर पानी फेरते हुए उन्हें काबू कर पुलिस के हवाले कर दिया है। फिलहाल मुख्य आरोपी 8 दिन के रिमांड पर है। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने बृहस्पतिवार को विधानसभा सचिवालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि विधानसभा सचिवालय नौकरियों में पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है। कुछ माह पहले यहां कनिष्ठ अभियन्ता, रिपोर्टर हिंदी व अंग्रेजी, जुनियर स्केल स्टैनोग्राफर, लिपिक, टेलीफोन अटेंडेंट, टेलीफोन ऑपरेटर, हिंदी टाइपिस्ट, रिकॉर्ड रिस्टोरर और चौकीदार पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
अंग्रेजी रिपोर्टर पद के लिए साक्षात्कार देने पहुंचे उम्मीदवार नीरज का रोल नंबर संदिग्ध पाया गया। जांच में पता चला कि नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से धोखाधड़ी करने वाले गिरोह की ओर से यह फर्जी रोल नंबर तैयार किया गया है। गिरोह के सरागना की पहचान अंबाला जिले के गांव रछेड़ी निवासी जितेंद्र के रूप में हुई है। विधानसभा के सुरक्षा विंग ने आरोपी जितेंद्र को सचिवालय बुलाकर उससे पूछताछ की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला है कि उसने न सिर्फ हरियाणा विधानसभा सचिवालय, बल्कि हरियाणा पुलिस में भी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से रुपये ऐंठे हैं। आरोपी ने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की ओर से खुद के 3 पहचानपत्र भी बना रखे हैं। वह खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर लोगों से रुपये ऐंठता था। कुछ को वह किसी मंत्री का पीए भी बताता था। विधानसभा सचिवालय ने 26 अक्तूबर को सेक्टर 3 पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करवाई। अगले दिन पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 8 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। उसकी चालाकी इस कदर थी कि वह उम्मीदवारों को रोल नंबर जारी करके साक्षात्कार में शामिल होने से रोक देता था। इसके लिए वह उन्हें कोविड प्रोटोकॉल के चलते साक्षात्कार स्थगित होने की झूठी जानकारी देता था। इसी दौरान रिश्वत की अगली किस्त ले लेता था।
Source News: chopaltv
