
Lok Sabha Election 2024: मिशन विपक्षी एकता के मद्देनजर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने आज मुलाकात की. इस दौरान दोनों के साथ बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) भी नजर आए. उम्मीद है कि मुलाकात के दौरान केजरीवाल, नीतीश और तेजस्वी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी एकजुटता पर बात की. मीटिंग खत्म होने के बाद नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल के साथ बाहर निकले और कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सही रहा पर इसके बावजूद केंद्र की तरफ से जो करने का प्रयास हो रहा है वह विचित्र है. सबको एकजुट होना होगा. हम केजरीवाल के साथ हैं. अधिक से अधिक विपक्षी दलों को एक साथ मिलकर कैंपेन चलाना होगा. हम पूरी तरह से सीएम केजरीवाल के साथ हैं.
हर पार्टी अध्यक्ष से मिलेंगे केजरीवाल?
वहीं, सीएम केजरीवाल ने कहा कि परसों 3 बजे मेरी ममता बनर्जी के संग मीटिंग है. मैं उसके बाद देश में सभी दलों के अध्यक्ष से मुलाकात करूंगा. मैंने आज नीतीश कुमार से भी अपील की है कि सभी पार्टियों से वो भी बात करें. मैं भी हर प्रदेश में जाकर, राज्यसभा में जब ये बिल आए, तब इसको हराने के खातिर मैं सभी से सपोर्ट के लिए बात करूंगा.
क्या एकजुट होगा विपक्ष?
बता दें कि नीतीश कुमार और केजरीवाल की ये मुलाकात कर्नाटक में सिद्धारमैया के सीएम के रूप में शपथ ग्रहण के 24 घंटे के अंदर हुई है. कर्नाटक में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली है. बेंगलुरु में शपथ ग्रहण के दौरान विपक्षी नेताओं के एक साथ वैसी ही तस्वीर देखने को मिली, जैसी 2018 में देखने को मिली थी. सभी नेताओं ने विपक्षी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की. सवाल उठता है कि 2019 को लेकर जो मैसेज दिया गया था, वो कारगर साबित नहीं हुआ. ऐसे में 2023 में फिर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा 2024 में क्या कमाल दिखा पाता है.
कांग्रेस के लिए संजीवनी है कर्नाटक की जीत!
दूसरी तरफ, कर्नाटक की जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुई है. दक्षिण के इस बड़े राज्य में सरकार बनने के बाद मिशन 2024 को लेकर कांग्रेस उत्साह से लबरेज है. प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस की पूरी कोशिश ऐसी ही कामयाबी ना सिर्फ कर्नाटक में दोहराने की, बल्कि पूरे देश में बीजेपी को कड़ी चुनौती देने की है. लिहाजा शपथ समारोह के दौरान राहुल गांधी ने कर्नाटक की जनता को शुक्रिया जताते हुए बीजेपी को निशाने पर लेने में जरा भी गुरेज नहीं किया.
कौन करेगा 2024 की जंग की अगुवाई?
हालांकि, 2024 की लड़ाई में कौन अगुवाई करेगा, इसको लेकर भी जंग किसी से छिपी नहीं है. विपक्षी दलों के अपने-अपने मंसूबे और अपनी हसरतें हैं. छोटे हों या बड़े दल, हर विपक्षी पार्टी की निगाहें, दिल्ली पर टिकी हैं कि कैसे 2024 में सियासी समीकरण बने और पीएम की कुर्सी पर उनका दावा और मजबूत हो सके. इसीलिए कर्नाटक में जीत भले ही कांग्रेस की हुई हो लेकिन हर विपक्षी दल इस जीत में अपना विजय तलाश रहा है. लिहाजा विपक्ष के इस शक्ति प्रदर्शन में कई नेताओं की मौजूदगी रही तो वहीं विपक्ष के कई बड़े नाम गायब भी रहे.
साल 2018 में एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह के दौरान भी विपक्षी नेताओं का मजमा लगा था. मंच पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, शरद पवार, तेजस्वी यादव, सीताराम येचुरी, मायावती, अखिलेश यादव, चंद्र बाबू नायडू और ममता बनर्जी जैसे विपक्ष के बड़े नाम मौजूद थे. 2019 से पहले उस तस्वीर ने बीजेपी सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता पर मुहर लगाने की कोशिश थी. अब 5 साल बाद सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण के दौरान भी वैसी ही तस्वीर दोहराने की कोशिश हुई, लेकिन ऐसा मुमकिन ना हो सका. इस बार कई दलों के बड़े नेता नदारद रहे.
सिद्धारमैया और शिवकुमार के शपथ ग्रहण में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव नहीं पहुंचे. हालांकि, दोनों को खुद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने बुलावा भेजा था. शपथ ग्रहण में इनकी मौजूदगी विपक्षी दलों की एकता के लिए जरूरी माना जा रहा था. कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद ममता ने कहा था कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस को वहां समर्थन देगी, जहां वो मजबूत है. लेकिन कांग्रेस को भी दूसरे क्षेत्रीय दलों का साथ देना होगा. वहीं समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव भी इस समारोह का हिस्सा नहीं बने. आम आदमी पार्टी, YSR कांग्रेस, BSP सहित कई दलों के नेता इस समारोह में नहीं नजर आए.
NEWS SOURCE : zeenews
