
दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर खुद को केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर बताने और सरकारी अधिकारियों समेत कई लोगों को ई-मेल, व्हाट्सऐप संदेश भेजकर तथा फोन कर उन्हें ठगने के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। हालांकि अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। मंत्री के सहायक निजी सचिव द्वारा दायर शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि पिछले कुछ महीनों से पदाधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग नंबरों से कॉल और मैसेज आ रहे थे, जिसमें फोन करने वाला खुद को मंत्री बताकर उनसे बात करता था। पूछताछ में पता चला कि ठगों द्वारा कॉल करने के लिए जिन फोन नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा था, वे अंतरराष्ट्रीय नंबर थे।
शिकायतकर्ता ने घोटालेबाजों द्वारा भेजे गए चैट के स्क्रीनशॉट भी उपलब्ध कराए। ऐसा ही एक मैसेज कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर तैनात एक अधिकारी को भेजा गया था। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘व्हाट्सएप चैट में हमने पाया कि घोटालेबाज प्रोफ़ाइल फोटो के रूप में मंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल कर रहे थे और फोन नंबर पर देश कोड के रूप में +60 था।’ पुलिस को संदेह है कि अपराधी लोगों को ठगने के लिए खुद को मंत्री बता रहे हैं। मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है। आईपीसी की धारा 419 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी के लिए सजा) और आईटी अधिनियम की धारा 66 सी (इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, पासवर्ड या पहचान का धोखाधड़ी से उपयोग) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने कहा कि कॉल स्पूफिंग तकनीक कॉल करने वाले को रिसीवर की स्क्रीन पर अपनी पसंद का फोन नंबर दिखाने में सक्षम है। अधिकारी ने कहा, “इस तकनीक का उपयोग अक्सर टेलीमार्केटर्स आदि द्वारा किया जाता है, जो कॉल को स्थानीय दिखाना चाहते हैं। जबकि वास्तव में यह राज्य या देश के बाहर से किया गया है। अपराधी इसका उपयोग लोगों को धोखा देने के लिए करते हैं और उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि कॉल करने वाला कोई और है। मार्च में पुलिस ने देश के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी की और एक गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया। इसमें कथित तौर पर राजनेताओं और कुछ आईपीएस अधिकारियों को अलग-अलग लाभ देने के लिए एक मुख्यमंत्री, वरिष्ठ खुफिया और सरकारी अधिकारियों के कार्यालय के नंबरों की नकल की थी।
NEWS SOURCE : livehindustan
