
फरीदाबाद। पशुओं का बीमा कराने के नाम पर फर्जीवाड़ा हो रहा है। पशु पालकों को इसका पता तब चलता है जब उनके पालतू पशुओं की मौत हो जाती है और क्लेम मांगा जाता है। क्लेम करने पर पता चलता है कि बीमा करने के नाम पर पशु पालकों से राशि तो ले ली गई पर इंश्योरेंस कंपनी में कुछ जमा ही नहीं हुआ तो क्लेम कैसे मिले। ऐसा ही एक मामला बल्लभगढ़ उपमंडल के गांव महमूदपुर की महिला पशुपालक कमलेश के साथ हुआ। पशुपालक कमलेश के अनुसार उसने हरियाणा सरकार की पशु बीमा योजना के तहत अपनी भैंस का बीमा नजदीक के पशु चिकित्सक अधिकारी मोहना के द्वारा 4 मार्च 2016 को करवाया। इसकी उसके पास रसीद भी है। बीमा करते समय फार्म नंबर 11811 भरकर हस्ताक्षर करवाए और भैंस के कान पर टैग भी लगा दिया। पशु चिकित्सक की ओर से बताया गया कि बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा किया गया है जिसका कवर नोट भी जल्द मिल जाएगा। इसके बाद सितंबर 2016 को कमलेश की भैंस बीमार हो गई और उसने चारा खान व पानी पीना छोड़ दिया। जिसकी सूचना उसने नजदीक के सरकारी पशु चिकित्सक डॉ. लेखी को दी।
6 करोड़ लोग होंगे शामिल, प्रयागराज में 12 साल बाद फिर महाकुंभ, इस दिन से होगी शुरुआत : Prayagraj Mahakumbh 2025
60000 रुपये थी दुधारू भैंस की कीमत
पशु चिकित्सक ने पशु का उपचार किया, पर पूरी जांच व उपचार के बाद भी भैंस को नहीं बचा सके। दो अक्टूबर 2016 को भैंस की मृत्यु हो गई। पीड़ित कमलेश के अनुसार उसकी दुधारू भैंस थी और इसकी कीमत 60000 रुपये थी। भैंस के मरने से उसे व उसके परिवार को काफी दुख हुआ और मानसिक व आर्थिक रूप से हानि हुई। कुछ समय बाद पशुपालक महिला ने इसकी जानकारी पशु चिकित्सक डॉ. लेखी को दी।
डॉ. लेखी ने 3 अक्टूबर को जाकर जांच की और भैंस का पोस्टमार्टम किया। साथ में भैंस के फोटो खींचे व क्लेम फॉर्म पर महिला के हस्ताक्षर कराकर क्लेम दिलाने का आश्वासन दिया। महिला को यह भी बताया गया कि क्लेम फॉार्म बीमा कंपनी में जमा कर दिया है। इससे कुछ दिन बाद चिकित्सा अधिकारी जिसने बीमा किया था, उस कवर नोट मांगा गया तो आनाकानी करने लगा और यह कहा कि इंश्योरेंस कंपनी के दफ्तर में जमा कर दिया है और वहां से जाकर क्लेम ले लो। जब इंश्योरेंस कंपनी के दफ्तर में गए तो कई चक्कर लगाने के बाद भी क्लेम नहीं मिला।
‘ऑर्गेनिक टॉप’ पर उर्फी जावेद हुईं ट्रोल, केला खाकर सीने पल चिपका लिए छिलके: Uorfi Javed Dress
कैसे खुला मामला?
इस पर महिला पशुपालक ने अदालत में चिकित्सा अधिकारी व इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ केस दायर किया। अदालत के आदेश पर पशु चिकित्सक अधिकारी ने इंश्योरेंस पॉलिसी कवर नोट संख्या 272400/47/2017/1176 जारी किया और कहा कि यह कवर नोट तो उस भैंस का है, जिसकी मृत्यु हो चुकी है इसके द्वारा तुम्हें क्लेम मिल जाएगा।
अदालत के आदेश पर इंश्योरेंस कंपनी में दस्तावेज दोबारा जमा कराए गए और 15 दिन के अंदर मामला निपटने के आदेश भी दिए गए। इसके बाद भी इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों ने लगातार चक्कर कटवाए पर मौजूदा राशि नहीं मिली। बाद में इंश्योरेंस कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम देने से इनकार कर दिया कि पॉलिसी तब की गई है, जब भैंस की मृत्यु हो चुकी थी। महिला पशुपालक ने अब अपने साथ हुए फर्जीवाड़ा की सारी जानकारी ग्रीवेंस कमेटी की अध्यक्षता करने आए मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष रखी। मुख्यमंत्री ने सारी जानकारी लेने के बाद पशुपालन विभाग के उपनिदेशक और पुलिस अधिकारियों को सारे मामले की जांच करने और महिला को न्याय दिलवाने के आदेश दिए हैं।
NEWS SOURCE : jagran
