
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली जेनिफर वॉटकिन्स को यूट्यूब से संदेश मिला कि उनका चैनल बंद किया जाएगा। उन्होंने कोई यूट्यूब चैनल नहीं बनाया था, इसलिए संदेश अनदेखा किया। सच्चाई यह थी कि उनका एक चैनल था। उनके 7 साल के जुड़वां बच्चे टैबलेट पर उन्हीं के गूगल अकाउंट से लॉग-इन कर यूट्यूब पर बच्चों की सामग्री देखते थे व अपने डांस के वीडियो अपलोड करते रहे थे। जेनिफर के एक बेटे ने एक स्कूली सहपाठी से मिली चुनौती के बाद खुद बिना कपड़ों के यह वीडियो बनाकर अपलोड किया था। गूगल की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक आधारित रिव्यू प्रणाली ने यह वीडियो चंद मिनटों में पकड़ा और डिलीट कर दिया।
ऐसे वीडियो गलत लोगों तक पहुंच जाएं तो बच्चे के यौन शोषण की वजह बन सकते हैं। इन्हें अपलोड करने के गंभीर परिणाम भी होते हैं, जो जेनिफर ने भुगते। उनके न केवल यूट्यूब, बल्कि गूगल, मेल, फोटो और जी-मेल से जुड़े कई एप अकाउंट भी बंद हो गए। गूगल से संपर्क करने और काफी प्रयासों के बाद जेनिफर को आखिरकार उनका अकाउंट वापस मिला। इस घटना ने बताया कि 5-6 साल के बच्चों के हाथों में मोबाइल फोन उन्हें खतरे में डाल सकते हैं।
गलत हाथों में जा सकती है सामग्री
स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययनकर्ता डेव विल्नर के अनुसार अगर आपत्तिजनक तस्वीरें या वीडियो गलती से अपलोड हुए भी हैं, तब भी उन पर कार्रवाई न करने से यह सामग्री गलत हाथों में पड़ सकती है। कई बाल यौन शोषण करने वाले ऐसी सामग्री का संग्रह बनाते हैं। उन्हें नग्न बच्चों की तस्वीरें देखनी होती है, यह बेहद खतरनाक होता है। नई डीपफेक तकनीक के दौर में यह और भी खतरनाक बात है।
NEWS SOURCE : amarujala
