
प्रयास के बावजूद स्वास्थ्य विभाग बंध्याकरण एवं नसबंदी का शत प्रतिशत लक्ष्य नहीं प्राप्त कर रहा है। इसका मुख्य कारण है कि महिलाएं बंध्याकरण एवं पुरुष नसबंदी के प्रति जागरूक नहीं हो रहे हैं। दोनों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। हालांकि, विभागीय अधिकारियों एवं चिकित्सकों के प्रयास से पहले से स्थिति बेहतर हुई है।
हमेशा परिवार नियोजन में पीछे रहने वाले पुरुष इस बार महिलाओं से 26.92 प्रतिशत आगे निकल गए हैं। विभागीय आंकड़े पर ध्यान दें तो वर्ष 2023 के अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह में 7,994 महिलाओं को बंध्याकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लक्ष्य के विरूद्ध 4,344 महिलाओं ने ही बंध्याकरण कराया। यानी लक्ष्य के 55.09 प्रतिशत महिलाओं ने बंध्याकरण कराया।
इस महीने 155 पुरुषों ने कराई नसबंदी
पुरुष नसबंदी के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसी नौ माह में 189 लक्ष्य की जगह 155 पुरुषों ने नसबंदी करवाया। यानी लक्ष्य के अनुरूप 81.01 प्रतिशत पुरुषों ने नसबंदी कराया। इस प्रकार पुरुष परिवार नियोजन में महिलाओं से 26.92 प्रतिशत आगे निकल गए हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग परिवार नियोजन के प्रति बेहतर कार्य कर रही हैं।
बंध्याकरण एवं नसबंदी के लिए ओबरा एवं बारुण में जीविका दीदियों के साथ मिलकर पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसके तहत बेहतर उपलब्धि मिलेगी। जीविका से सहयोग लिया जा रहा है। नौ प्रखंडों में पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा। आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, जीविका दीदी बंध्याकरण एवं नसबंदी को लेकर जागरूक कर रही हैं। स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बंध्याकरण एवं नसबंदी को लेकर बेहतर कार्य किया जा रहा है। – मो. अनवर आलम, डीपीएम डीएचएस औरंगाबाद
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