
अंबाला शहर: गोसंवर्धन में जुटी प्रदेश सरकार ने गोवर्धन पुनर्वास योजना के तहत प्रदेशभर की 250 गोशालाओं के लिए 70 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी की है। यह वे गोशालाएं हैं जिन्होंने बेसहारा गोवंश को सहारा देने की अनुमति पशुपालन विभाग को दी है। प्रत्येक गोशाला को ‘गोधन’ लेने पर न्यूनतम 3.50 लाख रुपये की ग्रांट जारी की जाएगी। यह ग्रांट उन गोशाला संचालकों को मिलेगी जो कम से कम 50 गोवंश को रखेंगे। 50 से 100 गोवंश रखने पर 7 लाख रुपये एक बार दिए जाएंगे। इसी तरह प्रत्येक पशु की संख्या बढ़ने पर 7 हजार रुपये अतिरिक्त बजट बढ़ा दिया जाएगा। हरियाणा गोसेवा आयोग से कुल 663 गोशालाएं पंजीकृत हैं। इनमें से 630 चल रही हैं। इनमें वर्तमान में 4 लाख 46 हजार 931 गोवंश को रखा गया है।
गोवंश के कानों पर लगाए टैग
पहले से रखे गए गोवंश के कानों पर पीले रंग के टैग लगाए गए हैं लेकिन पुनर्वास योजना के तहत जिन पशुओं को अब रखा जा रहा है उनके विशेष प्रकार के गुलाबी टैग लगाए जा रहे हैं ताकि इन पशुओं की अलग से गणना हो सके। 12 जनवरी को सरकार ने प्रदेशभर में इस योजना की शुरुआत की थी। पहले चरण में 50 हजार गोवंश के पुनर्वास के लिए 70 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी की गई है। 15 मदों का प्रयोग कर सकते हैं।
न्यूनतम 3.5 लाख या इससे अधिक की राशि को गोशाला संचालक गोशाला में चारा भंडारण के लिए स्टोर बनाने, गोशाला में फर्श डालने, गोशाला में शेड निर्माण करने, खुरली बनाने, चारा काटने की मशीन खरीदने, गोशाला में ट्यूबवेल लगवाने, ट्रैक्टर-ट्राली खरीदने सहित कुल 15 मदों में प्रयोग कर सकते हैं।
गोवंश के पुनर्वास की योजना
पहले चरण में करीब 50 हजार गोवंश के पुनर्वास की योजना है। इसके लिए 70 करोड़ की ग्रांट जारी कर दी गई है। प्रदेशभर में 250 गोशाला संचालकों ने करीब 68 हजार 291 गोवंश को रखने की सहमति जता दी है। इनमें से 143 गोशालाओं में हम 14 हजार 656 गोवंश को पिछले करीब डेढ़ महीने में शिफ्ट भी कर चुके हैं।
डॉ. भारत भूषण सुनेजा, वेटरनरी सर्जन, हरियाणा गोसेवा आयोग
NEWS SOURCE : jagran
