गुरु गोरखनाथ मानव कल्याण संस्थान कपूरथला पंजाब एवं संयुक्त आंदोलन परिषद के परमाध्यक्ष महंत कैलाश नाथ हठयोगी ने बयान जारी कर कहा कि हमारा भारतीय समाज गांव देहात संयुक्त परिवार की परिपाटी वाला समाज एवं जीवन शैली वाला समाज है संयुक्त परिवार में मिल जुल कर रहना मिल बांट बैठकर खाना सफाई से रहना सच बोलना किसी का नजर ना करना देश समाज परिवार गांव के लिए कुछ करना आदि संयुक्त परिवार में एक बीमार संपूर्ण परिवार बीमार एक का दर्द सबका दर्द होता था एवं है बदलते वातावरण में सब कुछ दिखावा छलावा नाटक प्रपंच हो गया है सन 1992 के बाद जो बदलाव देश समाज राजनीति लोगों के चिंतन चरित्र में आया है उस बदलाव स्वार्थ के कारण संयुक्त परिवार की परंपरा परिपाटी गांव देहात से युक्त होकर शहरों की तरफ तेज गति से आकर महानगरों के रूप में विलीन हो गई यहां आकर सभी राम-राम दुआ सलाम प्रणाम करना भूल गए रामलाल से आर एल बन गए नामकरण में बदलाव के चलते साइकिल स्कूटर ऑटो रिक्शा टैक्सी में बैठते ही परंपराओं मान्यताओं मर्यादाओं को तिलांजलि देकर आत्मनिर्भर बनने के चक्कर में अपने आप को भूल गए देश समाज परिवार में जो बदलाव अचानक आया है उसके लिए हमारी स्वार्थ में ही सोच विचारधारा लक्ष्य ही ना होना हवा हवाई की बातें करना धरातल पर झुक कर ना देखना आदि है
बदलाव परिवर्तन के लिए हम सब कम या अधिक जिम्मेदार हैं गांव में छलावा दिखावा नहीं था सभी लोग मिलकर रहना एक साथ उठना बैठना एक-दूसरे के सुख-दुख प्रकृति के बारे में जानना सहयोगात्मक भावना रखना पिछड़ापन गरीबी मजबूरी एक समान थी गांव देहात संयुक्त परिवार में पला बढ़ा हुआ आज भी एक दूसरे की मदद के लिए आगे आकर हाथ बढ़ाता है चाहे वह देश में हो या विदेश में उसके जीवन में जो शिक्षा संस्कार गांव देहात में माता-पिता विद्यालय गुरु जन ने दे दिया आज भी उसी उसके शरीर के रोम रोम में विराजमान है सहयोगात्मक सोच एवं रवैया होता है शहरों में दौलत वालों का बोलबाला है पड़ोसी पड़ोसी के साथ बोलचाल करने व्यवहार करने में शर्म आता है जिसका मूल कारण संस्कार सिद्धांत व्यवहार की कमी ऊंच-नीच दिखावा पैसे का छलावा अमेरिका इंग्लैंड विदेश उच्च शिक्षा का दिखावा है मैं गाड़ी वालो की सोच बैलगाड़ी वालों से दूर कर दिया है जबकि बैलगाड़ी वाले ने ही इस देश को गाड़ी वाला बनाया है आज गाड़ी वाले उनकी इज्जत ना करके यह दुर्भाग्यपूर्ण सोच विचार व्यवहार रखते हैं मैकाले वादी शिक्षा पद्धति सोच विचार रहन सहन की वजह से बदलाव के कारण से हमारा अपना सामाजिक परिवारिक तानाबाना चोपट हो गया है जो बड़ा दुर्भाग्य है दाढ़ी वाले सिर्फ ज्ञान ध्यान जुमले की बातें करते हैं यथार्थ से दूर रहते हैं धरातल सच्चाई दूर-दूर तक नहीं होती है सत्य से उनका कोई वास्ता नहीं होता है क्योंकि संयुक्त परिवार गांव देहात की परिभाषा विचार धारा को जीवन भर भ्रमण करते करते सात समुंदर पार फेक आए उन्हें तो भारतीय कला संस्कृति खाना-पान अपने लोगों के साथ मिलकर मनाने देखने खाने पीने में अच्छा नहीं लगता है
जब तक अगल बगल में गोरे ना हो भारत एक गांव देहात वाला देश है यहां के लोग सीधे-साधे संस्कारवान गुणवान दर्रे संतोष चौहान लोग हैं गांव में बिना हाथ पैर धोए नहाए कोई किसी काम पर नहीं जाता है बाहर से आना हाथ पैर मुंह धोना भोजन आदि करना एक व्यवस्था नियम था किंतु सैनिटाइजर नहीं था साबुन नहीं था गांव की मिट्टी से ही हाथ धोना परिपाटी एवं शुद्धता माना जाता था समय के बदलाव के साथ-साथ मिट्टी से पैदा होने वाले हर चीज में नए रूप रंग नए नामकरण के साथ रंग-बिरंगे पैकिंग में अलग-थलग दिखावे प्रलोभन मैं आने मिलने लगा और हम उसे अपना अविष्कार विकास मानकर प्रयोग कर जीवन की प्रणाली बना चुके हैं किसी भी वस्तु के साथ-साथ उस गांव देहात किसान मिट्टी का नाम नहीं जुड़ा है जहां वह वस्तु पैदा हुई है मेड इन चाइना ताइवान जापान यूएसए यूएस के नाम से हमारे यहां गांव देहात की मिट्टी में पैदा हुई चीजें हमें लोगों को ही नाम बदलकर नए नाम नए नाम नए दिखावे के साथ बेची जाती हैं आकर्षित और प्रलोभन दिया जाता है जो विचारणीय विषय है भारत आजादी के पश्चात से ही आत्मनिर्भरता के मार्ग पर चल पड़ा था इस देश का एक एक नागरिक स्वावलंबी स्वाभिमानी एवं आत्मनिर्भर है वह परेशान है दलालों से इंसाफ ना मिलने से राजनीतिक के दलदल की सोच से परेशान हैं सकारात्मक सोच वाले नेतृत्व की कमी के कारण किसान नौजवान मजदूर परेशान है कुशल नेतृत्व के अभाव के कारण देश समाज तनावग्रस्त त्रस्त है क्योंकि देश की शासक सत्ता सुख भोगने में मस्त हैं जब देश का हर व्यक्ति तनाव मुक्त होगा उस दिन असली मस्ती होगी हमारे संस्कारों सद्विचारो व्यवस्था को पाश्चात्य संस्कृति रहन-सहन खान-पान पहनावा ने नष्ट कर दिया है
उसी का परिणाम है असाध्य रोगों का प्रकट होना अवतार लेना आज भी गांव देहात का शिक्षित आदमी किसान भाई मजदूर नौजवान चोट लगने पर हल्दी दूध मिट्टी का लेप करता है पेट में दर्द गैस होने पर हींग अजवाइन काला नमक का सेवन करता है छोटी-छोटी बीमारी जैसे सर्दी जुखाम बुखार के लिए घरेलू उपाय एवं तुलसी अदरक का काढ़ा बनाकर सेवन करता है लेकिन प्रचार प्रसार के झूठे युग में जब तक उसका खून का टेस्ट नहीं होगा उसका इलाज ही नहीं होगा यदि इलाज होगा भी तो खेत मकान गाड़ी भेजकर होगा इलाज महंगा है डॉक्टर साहब विदेश चौहान से मैं पढ़कर आए हैं समस्या का समाधान आज की हमारी व्यवस्था में कम है समस्याएं पैदा करो राजनीति चमका व्यापार बढ़ाओ धन कमाओ की सोच ने हमारे सनातन परंपरा मान मर्यादा रहन-सहन व्यवहार को खराब कर दिया है भारत की प्राचीन परंपरा संस्कारों को जीवित रखकर ही आत्मनिर्भर हो सकते हैं जो देश समाज परिवार अपने अतीत को भुला देता है उसे इतिहास भी भुला देता है सनातन सत्य को स्वीकारना ही होगा।
