
नई दिल्ली (NDA Success Story). हरियाणा के रेवाड़ी की तंग गलियों से निकलकर भारतीय सेना के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान एनडीए तक का सफर तय करना साधारण उपलब्धि नहीं है. यह कहानी है जिया की, जिसने साबित कर दिया कि सफलता का रास्ता आलीशान बंगलों से नहीं, बल्कि पसीने से भीगी मेहनत और अटूट संकल्प से होकर गुजरता है. पिता ने बेटी के सपने पूरे करने के लिए दिन-रात ऑटो चलाकर पाई-पाई जोड़ी तो जिया ने भी एनडीए परीक्षा में जिलेभर में टॉप रैंक हासिल कर उनकी मेहनत सफल कर दी. जिया की सक्सेस स्टोरी उस रूढ़िवादी सोच पर करारा प्रहार है जो मानती है कि सेना की वर्दी और देश की रक्षा केवल बेटों का कार्यक्षेत्र है. एक छोटे से घर में, जहां कोचिंग की महंगी फीस भरना भी बड़ी चुनौती थी, वहां जिया ने अपनी किताबों को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. उनकी इस सफलता ने हरियाणा के घर-घर में उम्मीद जगा दी है कि अगर बेटियों को समान अवसर और हौसला दिया जाए तो वे सरहद की सुरक्षा से लेकर आसमान की ऊंचाइयों तक, हर मोर्चे पर देश का तिरंगा बुलंद कर सकती हैं.
पिता चलाते हैं ऑटो, बेटी संभालेगी देश की कमान
जिया के पिता मोहन लाल रेवाड़ी की सड़कों पर ऑटो चलाकर अपनी आजीविका कमाते हैं. जिया की मां रेखा देवी गृहिणी हैं. आर्थिक तंगहाली के बावजूद उन्होंने कभी जिया की पढ़ाई में बाधा नहीं आने दी. जिया ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए कहा कि उनकी मेहनत ही उनकी असली प्रेरणा रही. जब पिता थके-हारे घर आते थे तो उन्हें देखकर जिया को और ज्यादा मेहनत करने का जज्बा मिलता था. जिया के परिवार में उनके अलावा, उनके भाई-बहन हिमांशु और पारुल भी हैं.
सरकारी स्कूल से हुई पढ़ाई-लिखाई
ऑटो ड्राइवर की बेटी जिया ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, गांव सुलखा से पूरी की, उन्होंने निजी या महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना ही अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया. इसी सरकारी स्कूल की पढ़ाई ने उनका आत्मविश्वास मजबूत किया. एनडीए परीक्षा में सफल होकर जिया ने साबित कर दिया कि मेहनत ही वास्तविक सफलता की कुंजी है.
हर दिन की 15 घंटे पढ़ाई
12वीं के बाद जिया ने तय किया कि वह सेना में जाना चाहती हैं. इसके लिए उन्होंने UPSC NDA परीक्षा की तैयारी शुरू की. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने रोजाना लगभग 15 घंटे कठिन मेहतन की, साथ ही कुछ समय गुरुग्राम में NDA कोचिंग भी ली. तैयारी के दौरान उन्हें कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी दृढ़ता कम नहीं हुई.
कठिनाइयों से भरा रहा सफर
एनडीए परीक्षा की तैयारी के कठिन महीनों में जिया कई बार बीमार भी रहीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उनके माता-पिता का समर्थन, परिवार की प्रोत्साहना और जिया की अटूट इच्छाशक्ति ने उन्हें हर कठिनाई से पार पाकर लक्ष्य की तरफ अग्रसर किया. एनडीए परीक्षा 2024 में जिया ने रेवाड़ी जिले में सर्वश्रेष्ठ रैंक हासिल की. इस उपलब्धि ने उनके परिवार, गांव और जिले का नाम गर्व से रोशन कर दिया. जिया की कहानी संदेश देती है कि बेटियां भी हर चुनौती पार कर सकती हैं. उन्हें सही अवसर और समर्थन मिले तो वे ना केवल परिवार बल्कि पूरे समाज का सम्मान बढ़ा सकती हैं.
NEWS SOURCE Credit :news18
