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Home » कैसे दिखे हरियाली, जब पौधों की नहीं रखवाली

कैसे दिखे हरियाली, जब पौधों की नहीं रखवाली

faridabadnews24By faridabadnews24June 13, 2020No Comments3 Mins Read

फरीदाबाद : विश्व के टॉप 10 प्रदूषित शहरों में शुमार औद्योगिक नगरी में पर्यावरण संरक्षण को हर साल लाखों पौधे लगाने का दावा होता है, पर इन पौधों का बाद में क्या हुआ, इसका हिसाब रखने वाला कोई नहीं है। पौधारोपण पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता से अधिकतर पौधे दम तोड़ देते हैं। शहर में कुछ खास क्षेत्रों को छोड़ दें, तो हरियाली गायब होती जा रही है। यहां तक कि अरावली में भी संकट खड़ा है। यहां जितनी तेजी से पेड़ों की कटाई व चोरी हो रही है, उस अनुपात में पौधारोपण नहीं हो रहा है। हर साल करीब दो लाख पौधे रोपने का दावा

हर साल वन विभाग करीब दो लाख पौधे लगवाने के दावा करता है, लेकिन हकीकत ये है कि इनमें से 20 फीसदी पौधे भी पेड़ नहीं बन पाते। कहीं समय पर पानी न मिलने से, तो कहीं आवारा पशुओं के चट कर जाने से, तो कहीं पौधों को सुरक्षित रखने के लिए ट्री गार्ड का अभाव आदि इसकी वजह बन रहा है। जिले में विकास योजनाओं के लिए भी लगातार पेड़ों की बलि दी जा रही है। पिछले साल भी 1.73 लाख पौधे रोपने का दावा हुआ, पर अधिकतर जगह पौधे सूख गए हैं। इस साल 1.57 लाख पौधे रोपने की बात कही जा रही है। जहरीली होती सांस, बढ़ेंगी मुश्किलें

दिल्ली से सटी औद्योगिक नगरी में हमारी सांस के साथ जहर भी अंदर जा रहा है। इस जहरीली सांस को लेने के लिए हम मजबूर हैं। विकल्प भी कोई नहीं है। अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी बेफ्रिक हैं। तभी तो इस ओर ठोस कदम नहीं उठ सके हैं। पीएम 2.5 की मात्रा आम दिनों में भी 400 के आसपास रहती है, जो बेहद खतरनाक मानी जाती है। पेड़ ही इस जहरीली हवा को शुद्ध कर सकते हैं, लेकिन पौधारोपण अभियान सफल न होने से मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। वर्जन..

हर साल पौधे रोपने के लिए टेंडर छोड़े जाते हैं। पौधे लगाना और उनकी सालभर तक देखरेख करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की ही होती है। हमारी टीमें मॉनिटरिग करती हैं कि पौधे लगे या नहीं। वन विभाग की टीमें पौधों की 4 से 5 साल तक रखरखाव करती हैं।

-राजकुमार, जिला वन अधिकारी। सरकारी महकमे के अधिकारियों की उदासीनता से औद्योगिक नगरी पर खतरा मंडरा रहा है। हकीकत ये है कि पौधारोपण अभियान सिरे ही नहीं चढ़ता। बस लक्ष्य पूरा कर खानापूर्ति होती है। हम हर साल हजारों पौधे लगाते हैं और इनकी नियमित देखभाल भी कर रहे हैं। करीब आठ हजार पौधे ऐसे हैं, जिन्हें पानी, खाद व दवा दी जा रही है। और भी कई संस्थाएं हैं, जो पौधारोपण में बेहतर काम कर रही हैं।

-जितेंद्र भड़ाना, सदस्य, सेव अरावली ट्रस्ट

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