
India-Netherlands Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के दौरे के दूसरे दिन नीदरलैंड पहुंचे. 9 साल बाद इस यूरोपीय देश पहुंचकर पीएम मोदी ने ऐसी डील कर दी, जो चीन की चिंता बढ़ाने के लिए काफी है. अपने नीदरलैंड दौरे पर पीएम ने सेमीकंडक्टर (Chip) पर बड़ा समझौता किया है. छोटा सा देश नीदरलैंड तकनीक के मामले में सुपरपावर है. भारत और नीदरलैंड मिलकर अब भारत में चिप मेकिंग को तेज करेंगे.
नीदरलैंड के साथ मिलकर पूरा होगा चिप मेकर बनने का सपना
भारत ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चर बनना चाहता है. उसका ये सपना नीदरलैंड की सबसे बड़ी चिप मेकिंग कंपनी ASML के साथ मिलकर पूरा होगा. इस कंपनी का ताकत का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि ASML दुनिया की इकलौती कंपनी है जो एडवांस्ड चिप्स बनाने के लिए ‘लिथोग्राफी मशीनें’ बनाती है. बिना इस मशीन के ताइवान, अमेरिका जैसे देश भी एडवांस चिप नहीं बना सकेंगे.
TATA ने मिलाया ASML के हाथ
डच कंपनी ASML और भारत की टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच MoU साइन हो गया है. इस समझौते के तहत गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर प्लांट बनेगा. धोलेरा चिप प्रोडक्ट के लिए TATA 91,000 करोड़ का निवेश कर रही है. यहां तैयार चिप्स ग्लोबली ऑटोमोबाइल, मोबाइल डिवाइसेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की डिमांड को पूरा करेंगे. ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर टाटा ये प्लांट लगा रही है. नीदरलैंड की कंपनी का एडवांस्ड लिथोग्राफी कंपोनेंट्स मिलेगा. बता दें कि लिथोग्राफी, सेमीकंडक्टर बनाने के प्रोसेस का सबसे जटिल और महंगा काम है.
चिप के बाजार का बादशाह अब भारत के साथ
टाटा के साथ साझेदारी के बाद अब डच कंपनी ASML गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के आगामी 300 mm (12 इंच) सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में मदद करेगी. 30.44 अरब डॉलर के लिथोग्राफी कंपोनेंट्स मार्केट का बेताज बादशाह ASML अब टाटा के साथ जुड़कर भारत के सेमीकंडक्टर के सपने को पूरा करेगा. पीएम के दौरे पर भारत-EU FTA जल्द लागू करने, ग्रीन हाइड्रोजन ,डच कंपनियों के लिए भारत में निवेश के रास्ते, मैरीटाइम (समुद्री क्षेत्र), रिन्यूएबल एनर्जी , डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थकेयर पर अच्छी बातचीत हुई.
भारत की इस डील से चीन क्यों होगा परेशान ?
चिप के बाजार पर चीन का कंट्रोल है. अपने इसी वर्चस्व की वो दादागिरी भी दिखाता है, जब चाहे निर्यात पर पाबंदी लगा देता है. भारत अब तेजी से सेमीकंडक्टर के सेक्टर में काम कर रहा है. इस बाजार में भारत जैसे मजबूत खिलाड़ी के आने से चीन के एकाधिकार को सीधी चुनौती मिलेगी. डच कंपनी के साथ ये साझेदारी भारत के चिप मेकिंग को तेज और उन्नत कर देगा. अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक कंपनियां भारत को बड़े विकल्प के तौर पर देखती है. ऐसे में टाटा के धोलेरा प्लांट में एएसएमएल के सहयोग से बनने वाली चिप चीन की चिंता को जरूर बढ़ाएगा. ये डील भारत को चिप्स मेकिंग में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उसे एक बड़े निर्यातक के तौर पर सामने ला देगी.
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