गुरु गोरखनाथ मानव कल्याण संस्थान कपूरथला पंजाब एवं सन्त एकता आंदोलन परिषद के परमाध्यक्ष महंत कैलाश नाथ हठयोगी ने बयान जारी कर कहा कि वर्तमान समय में देश समाज समस्याओं एवं अनेक प्रकार की चुनौतियों के साथ संघर्षरत है व्यक्ति का प्रयास होता है कि अच्छे समाज का निर्माण हो किंतु अकेला व्यक्ति चाह कर भी व्यवस्था को बदल नहीं पाता और ना ही समझ पाता है क्योंकि व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं है व्यक्ति अकेला और व्यवस्था समूह में है बहुमत में हैं जो लोकतंत्र में शक्ति के रूप माना जाता है व्यक्ति चाह कर भी व्यवस्था को बदल नहीं सकता क्योंकि उसे भी समूह से लड़ने के लिए शक्ति भक्ति भाव और भावना चाहिए जो संभव नहीं है क्योंकि व्यक्ति अकेला है व्यवस्था समूह में है सर्वशक्तिमान है उसे वह सच्चाई को छुपाने की कला में पारंगत है
निपुण है व्यक्ति व्यवस्था को सुदृढ़ स्वच्छ करने के लिए वचनबद्ध प्रतिबद्ध है किंतु उसे भी समूह के भावनाओं का अनादर करके रोना पड़ेगा इसलिए व्यक्ति भी समूह का हमसफर बन जाता है उसकी शेर जैसी आवाज की दोनों की आवाज के साथ-साथ सुनाई पड़ने लगती है समाज में भी समूह के स्वर में स्वर मिलाकर अपने संसाधनों के लिए स्वर में स्वर मिलाने लगता है और इस प्रकार से व्यक्ति के साथ कार प्रयास के बावजूद भी व्यवस्था अपने आगोश में सभी को लपेटकर एक ऐसी व्यवस्था युग का निर्माण कर देता है कि संपूर्ण समाज का ताना-बाना अपने संसाधनों के लिए चारों तरफ घूमता फिरता है फलस्वरूप लोकतंत्र में एक युवक का श्रीगणेश होता है जिसकी व्यक्ति व्यक्तियों ने स्वप्न में भी कभी इसकी ऐसी कल्पना नहीं की थी आज जो कुछ भी हो रहा है और हम देख रहे हैं कुछ ऐसा ही है
जैसा कि व्यक्ति ने सोचा समझा और समूह के लहरों के बीच सदैव के लिए जल समाधि ले ली हो आने वाला समय समस्याओं और चुनौतियों का होगा समूह वाले लोग अपने संसाधनों के साथ पलायन कर जाएंगे और व्यक्ति अपने अतीत के संकल्पों में अपने भविष्य को खोजना शुरू कर देगा सफलता संभवत मिले ना मिले किंतु व्यक्ति का संकल्प अनुसार भागीरथ प्रयास जारी रहेगा या कहें वह अपने लक्ष्य की तरफ अग्रसर हो जाएगा व्यक्ति गांधी जी नेताजी सुभाष चंद्र बोस अशफाक उल्ला खान पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की तरह सफल होगा नवभारत का अभ्युदय होगा सनातन पुरातन भारतीय संस्कृति गंगा जमुनी संस्कृति चारों तरफ देखी जाएगी जिसकी सभी को उम्मीद है वर्तमान समय में तो हम एक दूसरे की तारीफ करने में लगे हुए हैं जिससे आपसी भाईचारा देश की एकता अखंडता के लिए एक चुनौती है
उष्ट्राणां च विवाहेषु गीतं गायन्ति गर्दभा:
परस्परं प्रशंसन्ति अहो रुपमहो ध्वनि:
अर्थात:- ऊंट की शादी हो रही थी गधा गीत गा रहा था दोनों एक दूसरे की तारीफ कर रहे थे कि आपका स्वर बड़ा अच्छा है आप दूल्हे के रूप में अच्छे लग रहे हैं इत्यादि………..।
