कोरोना वायरस के इलाज के लिए दुनियाभर के डॉक्टर वैक्सीन बनाने के लिए लगे हुए हैं, लेकिन भारत में तमिलनाडू में डॉक्टरों ने सिद्ध किया है कि हर्बल मिश्रण की कबासुरा कुडिनेर का कोरोना पर सकारात्मक असर हुआ है। सिद्धा के दो रिसर्च पेपरों में दावा किया गया है कि मिश्रण संक्रमित मरीजों पर प्रभावकारी रहा है।
कबासुरा कुडिनेर हर्बल मिश्रण है जिसमें अदरक, पिप्पली, लौंग, सिरुकनकोरी की जड़, मूली की जड़, कडुक्कई, अजवाइन और अन्य जड़ी बूटी शामिल हैं। इसको मिलाकर चूर्ण तैयार किया जाता है और बाद में इसमें पानी मिलाया जाता है। फिर काढ़ा बनाने के लिए इसे उबाला जाता है और एक चौथाई रह जाने पर इसे पिलाया जाता है। तमिलनाडु सरकार भी प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए इसके सेवन को प्रोत्साहित कर रही है। हालांकि यह भी साफ किया है कि यह कोरोना महामारी के इलाज की दवा नहीं है।
कोरोना संक्रमितों के दो समूहों पर अध्ययन किया गया। वेल्लोर के करीब प्राथमिक और सेकंडरी संपर्क में आए 84 लोगों पर यह अध्ययन हुआ। इसमें दावा किया गया है कि उच्च जोखिम वाले कोरोना मरीजों पर इस पेय पदार्थ के असर को इसे प्राथमिक सुबूत के तौर पर माना जा सकता है। यह अध्ययन अप्रैल में किया गया था। इसमें पाया गया कि जिन्हें कबासुरा कुडिनेर दिया गया वे कोविड-19 निगेटिव पाए गए और जिन्हें नहीं दिया गया वे पॉजिटिव पाए गए। जांचों की समीक्षा से पता चला कि मिश्रण और मरीजों के स्वास्थ्य स्थिति के बीच संबंध है।
तिरूपत्तूर जिले में अग्रहारम में क्वारंटीन केंद्र में 42 मरीजों को कबासुरा कुडिनेर दिया गया। इसी जिले में अंबूर तालुका के जामिया कॉलेज में बने क्वारंटीन केंद्र में यह मिश्रण नहीं दिया गया। डॉक्टरों की टीम ने एक अप्रैल से इन दोनों समूहों पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। इन्हें घर में बना खाना नहीं दिया गया। इन सभी को निगरानी टीम की तरफ से तैयार भोजन ही दिया गया। पहले क्वारंटीन केंद्र के समूह में शामिल वयस्कों को खाने के बाद नियमित तौर पर 60 मिली मिश्रण और बच्चों को 15 मिली मिश्रण दिया गया। यह मिश्रण लगातार 14 दिन तक दिया गया। समूह में शामिल लोगों की उम्र तीन से 70 साल के बीच थी।
पेपर के अनुसार, समूह में शामिल पांच वर्षीय बच्चे को इस हर्बल मिश्रण की चार डोज पीने के बाद सूखी खांसी हो गई जबकि 10 मरीजों को इसे लेने के बाद हल्के लक्षणों से तत्काल राहत मिली। इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं देखा गया। पॉजिटिव मरीजों के सीधे संपर्क में आए छह मामलों में पीसीआर जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई। 14 दिन बाद फिर से जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई।
