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Home » कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग, टेस्टिंग सुविधा बढ़ाने, क्लिनिकल मैनेजमेंट के साथ जन-जागरूकता जरूरी

कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग, टेस्टिंग सुविधा बढ़ाने, क्लिनिकल मैनेजमेंट के साथ जन-जागरूकता जरूरी

faridabadnews24By faridabadnews24July 9, 2020No Comments5 Mins Read

चंडीगढ़ : हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनन्द अरोड़ा ने कहा कि वैश्विक कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने और प्रभावी ढंग से इसका मुकाबला करने के लिए समय-समय पर सक्रिय रणनीतियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जिला उपायुक्तों और युनिट कमेटियों को कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। मुख्य सचिव आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों और जिला उपायुक्तों के साथ संकट समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रही थी।

उन्होंने कोविड-19 के प्रबंधन की तैयारियों में तेजी लाने, टेस्टिंग सुविधा बढ़ाने, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग, क्लिनिकल मैनेजमेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ जन-जागरूकता गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को भी कंटेनमेंट जोन के प्रवेश और निकास प्वाइंट पर कड़ी निगरानी रखनी होगी। मुख्य सचिव ने निर्देश देते हुए कहा कि कोविड-19 के पॉजीटिविटी रेट को कम करने के लिए विशेष रूप से कंटेनेंट जोन में टेस्टिंग क्षमता में वृद्धि की जानी चाहिए, क्योंकि व्यापक कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग करने के साथ टेस्टिंग क्षमता में वृद्धि करने से ही कोविड-19 के पॉजीटिविटी रेट को कम किया जा सकता है। इसके अलावा, हर जिले में एंटीजन टेस्टिंग की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिस दिन कोरोना को कोई नया मामला सामने आता है तो 80 प्रतिशत कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग उसी दिन पूर्ण की जानी चाहिए।

श्रीमती अरोड़ा ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में हाई डिपेंडेंसी युनिट की स्थापना और मृत शरीर के प्रबंधन को प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इसके अलावा, प्रत्येक रोगी को मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रदान किया जाना चाहिए और कोविड-19 रोगियों के रिश्तेदारों के बीच उत्पन्न अनिश्चितता को दूर करने में मदद करने के लिए एक तंत्र भी विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि कैबिनेट सचिव के साथ हाल ही में हुई बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कंटेनमेंट जोन, आईईसी गतिविधियों को बढ़ाने और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए जारी दिशा-निर्देशों के कड़ाई से क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि हालांकि, हरियाणा में कोविड-19 मृत्यु दर राष्ट्रीय दर के मुकाबले बहुत कम है और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी हरियाणा द्वारा कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए किए गए प्रयासों और व्यवस्था की प्रशंसा की है, फिर भी प्रत्येक जिला प्रशासन को मृत्यु दर को 1 प्रतिशत से नीचे लेकर आने के भरसक प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि दवाओं और ऑक्सीजन सिलेंडर की पर्याप्त उपलब्धता और आपूर्ति बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रोहतक की तरह अन्य जिलों के मेडिकल कॉलेजों में भी प्लाज्मा उपचार शुरू करने के लिए संभावना तलाशी जाए। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में प्लाज़्मा डिपॉजिट बैंक स्थापित किया गया है और अन्य जिलों में भी इसकी स्थापना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बहु अनुशासनिक अधिकारियों और विशेषज्ञों द्वारा निगरानी की जानी चाहिए। मुख्य सचिव ने कहा कि हरियाणा के बाहर से आने वालों की निगरानी प्राथमिकता के आधार पर रखनी चाहिए। इसके अलावा, राज्य में प्रवेश करने वाले प्रत्येक वाहन की जाँच सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए।

कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए आईइसी गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि जागरूकता गतिविधियाँ व्यापक रूप से की जानी चाहिए ताकि कोविड-19 लक्षणों से संक्रमित किसी भी व्यक्ति की सूचना समय पर दर्ज हो सके और उसे इलाज के लिए समय पर अस्पताल ले जाया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में युनिट कमेटियों को कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और होम आइसोलेशन में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की निगरानी के लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही दी जानी चाहिए। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक जिले में कोविड-19 सुरक्षित तंत्र को सुनिश्चित किया जाना चाहिए और उसका पालन किया जाना चाहिए, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग मानदंडों, फेस मास्क पहनना आदि शामिल हैं। इसके अलावा, सार्वजनिक परिवहन, अस्पतालों, मंडियों में कड़ी नजर रखी जाए। इसके अलावा, गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों, विशेष रूप से विवाह, धार्मिक और अन्य समारोहों का आयोजन करते समय, का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि जो होम आइसोलेशन में रह रहे हैं, विशेष रूप से कंटेनमेंट जोन में, ऐसे सभी लोगों की स्वास्थ्य स्थिति पर सक्रिय निगरानी रखी जाए और टीबी, किडनी रोग, आदि जैसे सह-रुग्णता से पीडि़त लोगों के स्वास्थ्य स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों के कार्य संचालन के समय को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए और इकाइयों में एसओपी का पूर्ण रूप से अनुपालन किया जाए। उन्होंने कहा कि लघु उद्योगों के लिए भी विस्तृत एसओपी तैयार करने के लिए संभावनाएं तलाशी जाएं।
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चण्डीगढ, 8 जुलाई- हरियाणा में सार्वजनिक निजी भागीदारी पद्धति पर कचरे के शत-प्रतिशत डोर टू डोर कलेक्शन, ढुलाई, प्रसंस्करण और निपटान के लिए एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना का विकास सुनिश्चित किया जायेगा। हरियाणा की मुख्य सचिव श्रीमती केशनी आनंद अरोड़ा की अध्यक्षता में आज यहां हुई एक बैठक में इस परियोजना की व्यवहार्यता और इसके स्थायित्व को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 81 शहरी स्थानीय निकायों को 13 कलस्टरों में बांटा गया है ।

बैठक में यह बताया गया कि कलस्टर में विभाजित किये जाने से म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडबल्यू) को घर-घर जा कर एकत्रित किया जा सकेगा। इसके अलावा, म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकेगा।  बैठक में वेस्ट टू एनर्जी फैसिलिटी, वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट, आरडीएफ प्रोसेसिंग फैसिलिटी ,बायो मेंशन फैसिलिटी तथा सैनिटरी लैंडफिल के डिजाइन एवं क्षमता और लीचेट ट्रीटमैंट फैसिलिटी आदि पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि  एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना के तहत  शिकायत निवारण केंद्र की स्थापना का भी प्रस्ताव है। यह परियोजना ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 तथा एनजीटी के निर्देशों का पालन करेगी।

 बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री आलोक निगम, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री एस.एन. रॉय, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री टी वी एस एन प्रसाद तथा नगर एवं ग्राम योजना और शहरी संपदा विभाग के प्रधान सचिव श्री ए.के. सिंह के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

clinical management is essential faridabadnews24 Public awareness along with contact tracing testing facilities
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