हरियाणा : हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने स्वीकार किया है कि ऑनलाइन कक्षाओं के आयोजन से विद्यार्थियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के कई जिलों से इस तरह के फीडबैक आ रहे हैं। प्राइवेट स्कूल संचालकों द्वारा अपनी सुविधा के लिए अधिक समय तक ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसके बावजूद सरकार ऑनलाइन कक्षाओं का समय कम करने पर विचार कर रही है।
बृहस्पतिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार हरियाणा में भी ऑनलाइन कक्षाओं का समय कम किया जाएगा। इस संबंध में बहुत जल्द फैसला लेकर प्रदेश वासियों को अगवत करवा दिया जाएगा। कंवर पाल गुर्जर ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के चलते निजी स्कूलों को दोबारा खोलने में कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। जिला स्तर से मंगवाई गई रिपोर्ट में पता चला है कि निजी स्कूलों में दूर-दराज से बच्चे आते हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण का खतरा है। दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों को खोलने में कोई दिक्कत नहीं है। क्योंकि वहां ज्यादातर लोकल बच्चे ही आते हैं। इस मामले में हरियाणा सरकार द्वारा केंद्र की गाइडलाइन के अनुसार काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्कूल खोलने के मामले में केंद्र द्वारा जो फैसला किया जाएगा उसे ही हरियाणा में लागू किया जाएगा। दसवीं के परीक्षा परिणाम पर संतोष व्यक्त करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि दसवीं में केवल साइंस का पेपर ही बाकी था। विद्यार्थी ज्यादातर पेपर दे चुके थे। इसलिए यह परिणाम औसत के आधार पर नहीं बना है। हरियाणा के सरकारी स्कूलों का परिणाम लगातार सुध रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा द्वारा परीक्षा परिणाम पर सवाल उठाए जाने को लेकर पलटवार करते हुए गुर्जर ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी सरकार के कार्यकाल के दौरान बच्चों को फेल न करने का नियम बनाया था। लेकिन अभिभावक इस फैसले को गलत मानते थे। जिसे अब संशोधित किया गया है।
प्रदेश में दिव्यांगों के लिए वर्क फ्रॉम होम की सुविधा
हरियाणा सरकार ने कोरोना के चलते दिव्यांग व्यक्तियों को बड़ी राहत देते हुए नियमित, अनुबंध और दैनिक वेतन आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को घर से ही काम करने की छूट दी है। 50 प्रतिशत या इससे अधिक की शारीरिक विकलांगता से चलने में असमर्थ और दोनों आंखों से दृष्टिहीन कर्मचारी घर से ही काम कर सकेंगे। इस अवधि को सभी उद्देश्यों के लिए ड्यूटी के रूप में माना जाएगा। मुख्य सचिव की ओर से इस संदर्भ में विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर दिशा-निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित कराने को कहा है।
