फरीदाबाद : हेपेटाइटिस को लेकर लोग गंभीर नहीं हैं। लीवर से संबंधित बीमारी को गंभीरता से नहीं लेते हैं। इसके चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दिवस की थीम हेपेटाइटिस मुक्त भविष्य रखा है। इसमें विशेषकर माताओं एवं नवजात को विशेष रूप से शामिल किया गया है। जानकारी के अभाव में हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होता है। निजी अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार एक महीनें में 100 से 125 करीब में मरीज आते हैं। इनमें से अधिकतर लोगों को अस्पताल पहुंचने के बाद बीमारी का पता लगता है। हेपेटाइटिस के पांच प्रकार ए, बी, सी, डी व ई हैं। इनमें से बी व सी घातक हैं। जो रक्त विकार के कारण होते हैं। वर्तमान में हेपेटाइटिस- बी से करीब तीन फीसदी लोग संक्रमित हैं, जबकि वहीं 95 फीसद लोगों को इस बीमारी के बारे में जानकारी नहीं है। जानकारी के अभाव में यह बीमारी गंभीर हो जाती है और लीवर के कैंसर का रूप भी ले लेती है। ज्यादातर सामान्य स्वास्थ्य जांच, पीलिया, लीवर की गड़बड़ी या लीवर कैंसर के टेस्ट में इसका पता चलता है।
-डा. अमित मिगलानी, फोर्टिस एस्कार्ट्स अस्पताल साफ-सफाई ही हेपेटाइटिस बचाव का एक मात्र तरीका है। सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल का सेवन करना। अच्छी तरह से पका हुआ भोजन करना लीवर के संक्रमण को रोकने में मदद करता है। सभी प्रकार की सब्जियां, दालें व अनाज हेपेटाइटिस के बचाव में मुख्य भूमिका निभाते हैं। हालांकि अगर अधिक वजन वाले हैं या मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति को कम करने के लिए वसा और कम चीनी वाला आहार लेना चाहिए।
-डॉ. विशाल खुराना, मेट्रो अस्पताल हेपेटाइटिस लीवर संबंधित बीमारी है और यह वायरस के संक्रमण से फैलती है। हेपेटाइटिस की बीमारी का पता चलने पर संक्रमित से दूर रहना चाहिए। यह मां से बच्चे में हो सकती है। इसके बचाव के लिए अब टीके भी आ गए हैं और इसका टीका तीन बार लगता है। पहला टीका बच्चे के जन्म के तुरंत बाद, जबकि दूसरा टीका बच्चे के एक महीने के होने के बाद और तीसरा टीका छह महीने पर लगाया जाता है। टीका 95 फीसद तक वायरस से लड़ने के लिए कारगर होता है।
-डा. भास्कर नंदी, सर्वोदय अस्पताल
