फरीदाबाद : आठ वर्षीय खुशी की हत्या मामले में पुलिस को उसकी मां रानी पर शुरू में ही शक हो गया था, मगर गिरफ्तारी का आधार नहीं मिल रहा था। लटजीरा(ओंगा) के बीजों ने राह दिखाई और शक यकीन में बदला। खुशी के भाइयों से पूछताछ में पुलिस टीम को पता चला कि उनकी मां रानी बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे घर से निकली थी। शाम 4 बजे वापस लौटी। शनिवार को पुलिस के हाथ लगी सीसीटीवी फुटेज में वह खुशी का हाथ पकड़कर ले जाते दिखी, मगर पूछताछ में उसने हत्या से इन्कार कर दिया। उसके बघौला जाने का ठोस सबूत नहीं था। मामला उसकी बेटी की हत्या से जुड़ा था, इसलिए पुलिस एक फीसद भी जोखिम लेने की भी स्थिति में नहीं थी। जरा भी गलती होती, तो किरकिरी तय थी। क्राइम ब्रांच डीएलएफ प्रभारी इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने गौर किया कि गांव बघौला में शव मिलने के स्थान पर जाने वाले सभी साथियों के कपड़ों में लटजीरा के बीज चिपके थे।

उन्होंने रानी से बृहस्पतिवार को पहने कपड़े मंगवाए। उनमें भी वैसे ही बीज लगे मिले। इससे साफ हो गया कि रानी वारदात स्थल पर गई थी। पुलिस ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया। लटजीरा मैदानी इलाकों में पाई जाने वाली वनस्पति है। इसकी ऊपरी परत पर जीरे की तरह दिखने वाले बीज होते हैं। हल्की रगड़ से ही इसके बीज कपड़ों में चिपक जाते हैं और आसानी से नहीं छूटते। बेटी की हत्या के बाद भी पूरी तरह सामान्य थी रानी ।
अपने ही हाथ से बेटी की हत्या के बाद भी रानी पूरी तरह सामान्य थी। उसने पुलिस को बताया कि हत्या के बाद वापस लौटते वक्त वह शाम को सब्जी बनाने के लिए बाजार से टमाटर लेकर आई। पति राजेश के ड्यूटी से वापस लौटने पर उसके साथ खुशी की तलाश भी की।
