नई दिल्ली : आंध्र प्रदेश के समुद्री क्षेत्र में स्थित रावा आयल एंड गैस फील्ड के बाबत वेदांता और वीडियोकोन के पक्ष में फारेन आर्बिट्रेशन अवार्ड को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को ब़़डा झटका दिया है। रावा आयल एंड गैस फील्ड को 2003 से 2007 के बीच विकसित किया गया है।

फारेन आर्बिट्रेशन अवार्ड में वेदांता और वीडियोकोन को रावा आयल एंड गैस फील्ड के विकास के लिए 49.9 करोड़ डालर की रिकवरी की अनुमति मिली है। जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस अवार्ड के खिलाफ केंद्र की अर्जी खारिज कर दी। फारेन आर्बिट्रेशन अवार्ड के खिलाफ केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के जरिये जून में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
फॉरेन आर्बिटेशन ने जहां 49.9 करोड़ डालर की रिकवरी की बात कही है वहीं सरकार इस मामले में अधिकतम 19.8 करोड़ डालर ही देना चाहती थी। रावा आयल फील्ड से तेल खनन के मुद्दे पर सरकार और वेदांत की पूर्व कंपनी केयर्न इंडिया के बीच हिस्सेदारी को लेकर विवाद पैदा हुआ।
बता दें कि वेदांता समूह की कंपनी केयर्न ऑयल एंड गैस को आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र स्थित अपने रावा तेल एवं गैस फील्ड के अनुबंध में 10 साल का विस्तार मिला है। केयर्न के मुताबिक, इस अनुबंध विस्तार के साथ उत्पादन साझेदारी अनुबंध (पीएससी) 28 अक्टूबर 2019 से अगले 10 साल के लिये वैध हो गया है। केयर्न आयल एण्ड गैस के लिये भारत में रावा सबसे पुरानी उत्पादक संपत्ति है। यह पहला बड़ा फील्ड है जिसे पीएससी के तहत विस्तार मिला है। यह विस्तार उत्पादन साझोदारी अनुबंधों को विस्तार मंजूरी नीति के तहत मिला है। सरकार ने ढाई दशक पहले छोटे, मझोले एवं खोजे गये तेल क्षेत्रों को निजी संयुक्त उद्यम कंपनियों को देते समय इस पर हस्तारक्षर किये थे।रावा तेल और गैस फील्ड देश के पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी बेसिन के उथले अपतटीय क्षेत्र में है।
