फरीदाबाद : वोटर्स पार्टी ने देश में चली आ रही सरकारों की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुऐ चौथी सरकार गांव की खुद की सरकार बनवाने का संकल्प लिया है और यह फैसला इसलिए लिया गया है कि सभी राजनीतिक दलों व सरकारों मैं वोटर्स की कोई भागीदारी और हिस्सेदारी सुनिश्चित नहीं है देश के सभी वोटरों ने देश की सरकार बनवाई जिसे प्रधानमंत्री जी चलाते हैं प्रदेशों की सरकारें बनवाई जिससे मुख्यमंत्री जी चलाते हैं और तीसरी प्रशासनिक सरकार जो जिलों के ऊपर तैनात है। यह तीन स्तरीय व्यवस्था आजादी से लेकर आज तक समाज को न सुरक्षा उपलब्ध करा पाई है और ना ही शिक्षा और स्वास्थ्य उपलब्ध करा पाई है ।सब कुछ खरीदना पड़ रहा है वह भी उन दुकानों की मर्जी का अपनी मर्जी का नहीं। अब तो हालात यह हो गए हैं परमात्मा के द्वारा दिया गया जल् भी हमें खरीदकर पीना पड़ रहा है और अन्नदाता किसान को भी समय पर बिजली पानी खाद बीज ना मिलने के कारण अच्छी पैदावारी करने से वंचित किया जा रहा है और जो कुछ वह पैदा कर लेता है उसका भी मूल्य सरकार सही नहीं दे पा रही है। इसलिए वोटर्स पार्टी ने फैसला लिया है कि अब गांव में गांव की सरकार होगी ।इस सरकार से प्रशासनिक अधिकारियों को भी बहुत बड़ा फायदा होगा।

जैसा कि आप सभी जानते हैं समाज का कोई भी वर्ग अपनी समस्या को लेकर केंद्र या राज्य सरकार से समाधान की मांग करता है उन्हें रोकने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रशासनिक कर्मचारियों को उन्हें रोकने का आदेश दिया जाता है। जो टकराव पैदा करता है यह टकराव केवल देश की चौथी सरकार बनने से ही समाप्त हो सकता है। इसलिए वोटर्स पार्टी जन विरोधी नीतियों का विरोध करती है और साथ ही देश के किसानों से अपील करती है कि वह केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा लिए गए फैसलों का सम्मान अवश्य करें । यदि वह जनहित में है तो और अपनी जमीन का मालिकाना हक कभी भी किसी भी उद्योगपति या विदेशियों को ना दें सरकार देश के विकास के लिए उन्नति के लिए जितने भी उद्योग लगाना चाहती है लगाए हम उसका समर्थन करते हैं लेकिन साथ ही हम यह भी बता देना चाहते हैं कि हमारी जमीन किराए पर यानी लीज पर लेने का कार्य सरकार करें हम उसका स्वागत करते हैं और वोटर्स पार्टी के प्रदेश संयोजक सहीराम रावत ने गांव के हर नौजवान से वायदा किया है कि गांव में अपनी सरकार बनाओ और गांव में ही सभी रोजगार पाओ अब किसान बेचारा नहीं रहेगा किसान अपने खेतों में पैदा किए हुए हर माल का मूल्य खुद निर्धारित करेगा।
