फरीदाबाद : हरियाणा वाल्मीकि महासभा के प्रदेशध्यक्ष एम.एल सारवान(पूर्व सेवानिवृत आईएस अधिकारी) का मवई गांव में बिजेन्द्र वाल्मीकि के कार्यालय पर फूलों की माला पहनाकर और पुष्प गुच्छा भेंट कर जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर एम.एल सारवान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों का नवीनतम फैसला हम सभी की जीत है जिसमें कहा गया है कि देश के सभी राज्यों में अंतिम सौपान पर खड़ी अति अनुसूचित जातियों को एससी वर्गीकरण करके राज्य सरकार किसी वर्ग के भीतर उप वर्ग के जरिए आरक्षण का लाभ दे सकती है।

उन्होनें कहा कि माननीय संवैधानिक पीठ ने अपने निर्णय प्रस्तर 40 में विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि ंसफाई पेशा उपजाति वर्ग जिसे वाल्मीकि नाम दिया गया है,वह वर्षो से वहीं है,जहां से पहले थे,उन्हें आगे लाना है। क्या अन्तरकाल तक पिछड़ापन इनके ही भागय में लिखा रहेगा। एम.एल सारवान ने कहा कि 70 वर्ष पश्चात शीर्ष अदालत ने अनुभव करते हुए राज्य सरकारों को संविधान की सीमाओं के अन्दर ही अनुसूचित जातिवर्ग में उपवर्गीकरण के आधार पर आरक्षण में वंचित कमजोर दलित उपजातियों को न्यायोचित भागीदारी देने का उपयुक्त और संविधान सममत उपाय सुझाया है। श्री सारवान ने कहा कि यह एक सुखद अवसर है जब शीर्ष अदालत भी समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के आंसू पौछने के लिए आतुर है,तो इसे लागू करने में सरकारों को संकोच क्यो हो। एम.एल सारवान ने कहा कि आरक्षण में लाभ दिए जाने के सन्दर्भ में हम माननीय मंत्री चौ.कृष्णपाल गुर्जर से भी मिले थे और उनसे विनम्र निवेदन किया कि सामाजिक न्याय के मददेनजर इस प्रकरण में कमजोर दलित उपजातियों की लंबे समय से की जा रही मांग के समर्थन के साथ ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अन्त्योदय की संकल्पना को साकार करने हेतू आप अपने स्तर से यथाांभव सहयोग करने की कृपा करें।
इस मौके पर महासभा के महासचिव सत्यवान दिलौड़,उपप्रधान कूपाल सिंह वाल्मीकि,बी.के चौहान,महेश सारवान,अशोक कीर,रामबीर महरेलिया,अत्तर सिंह,लीलूराम भगवाना,विक्रम अरूआ एडवोकेट,ब्रहम प्रकाश(एडीए),बह्रम सिंह चिड़ालिया,दुष्यंत स्वामी,संदीप सीही,ांजीव कुमार महरेलिया,रतनदीप महरेलिया,विनोद प्रधान,दानसिंह,जोगिन्द्र मौजदू थे।
