आदरणीय पुलिस आयुक्त साहब सादर नमस्ते
फरीदाबाद : मैं संजय खट्टर सेक्टर 55 रहता हूं कुछ समय पहले मैं प्रोपेर्टी का काम करता था अजलाल काम है नही तो इसलिये आफिस बंद करके घर से ही देख लेता हूं । हमारे पास ही सेक्टर 56 नया बस रहा है धीरे धीरे आबादी बाद रही है वहाँ 36 ओर 54 गज के प्लाट भी है उनको आल्लोट हुए 15 साल के लगभग हो गए ये छोटे प्लाट bpl केटेगरी के लोगों को होते है। अलॉटमेंट मैं लिखा होता है कि ये लोग कुछ समय तक इन्हें बेच नही सकते लेकिन पैसे की जरूरत की वजह से ये लोग डीलर से संपर्क मैं आकर जो अच्छी कीमत मिलती है उसे बेच देते है । मैंने आपको पहले ही बता दिया कि सरकार के कुछ नियम है वो इन्हें काम कीमत पर इसलिए देती है कि वो रहे इसे बेचे ना ओर उसे कुछ वर्षों तक ट्रांसफर नही करती डीलर भी रिस्क लेकर ओर प्लाट विक्रेता से कुछ कागज बिना रजिस्ट्रेशन के sign करवा कर खरीद लेता है उसे आगे किसी न न किसी को टिका देता है उसका यही काम है।

इसके बाद शुरू होता है गोरखधंधा।जिन लोगोँ ने प्लाट बेच दिया उसके पास जाते है कुछ शरारती तत्व उन्हें दोबारा पैसे का लालच देकर कहते है उसे हम आप देख लेंगे जिन्हें तुमने बेचा है तुम तो पैसे लो और sign कर दो या रजिस्ट्री कर दो क्योंकि सरकार का दिया समय पूरा हो चुका होता है और वो उसको भी बेच देते है । उनमें से कुछ ईमानदार भी होते है जो नही बेचते दोबारा लेकिन अधिकतर बेच देते है। अब शुरू होता है महाभारत पहले वाली पार्टी और अब वाली पार्टी मैं दोनों खरीदार होते है किसी ने 10 साल पहले पेमेंट की होती है कोई आज खरीद रहा है। वो आज की कीमत से थोड़ा कम देता है क्योंकि उसे पहले पता होता गई कि उसने बेचा हुआ है लेकिन इनमें से कईयों को पता ही नही होता कि इसने बेचा हुआ है या नही झेगड़ा थाने पहुचता है। थानेदार दोनों बिलियों की लड़ाई मैं क्या करता होगा इसे आप भलीभांति समझ सकते है। लाखों का लेन देन होता है और जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत सिद्ध होती है।
