फरीदाबाद : एक सदी से भी अधिक समय से पुराना पर मनोरंजन, सूचना व खबरों का बेहतरीन, सस्ता व सुंदर साधन रेडियो का स्वरूप भले ही बदल गया हो, पर इंटरनेट के दौर में भी इसका महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि स्वयं को इंटरनेट से जोड़ कर रेडियो ने अपनी पहचान विश्वव्यापी बनाते हुए श्रोताओं को और अधिक संख्या में अपने साथ जोड़ लिया। आज भी रेडियो पर गीत-संगीत का खूब दौर चलता है, इसमें रोचकता पहले से ज्यादा आ गई है। फर्क आया है, तो इतना कि अनाउंसर की जगह आरजे (रेडियो जाकी) ने ले ली है, जिन्हें अब अपनी प्रस्तुति देने के लिए ज्यादा तैयारी करनी पड़ती है। उनकी आवाज का अंदाज भी बदला है। पहले जहां उन तक श्रोताओं की चिट्ठियां पहुंचती थी और श्रोता अपना नाम अनाउंसर के मुख से सुनने के लिए उत्सुक रहते थे, वही श्रोता अब आरजे से सीधे जुड़ कर वार्तालाप करते हैं।

औद्योगिक नगरी में भी सूरजकुंड रोड पर मानव रचना शिक्षण संस्थान के प्रांगण में कम्युनिटी को जोड़ने के मकसद से रेडियो मानव रचना की स्थापना हुई, हाल ही में सी.दास ग्रुप ने रेडियो महारानी के नाम से कम्युनिटी रेडियो की शुरुआत की है, मंजूरी मिलने तक फिलहाल इसे प्रयोग के तौर पर इंटरनेट रेडियो के रूप में संचालित किया जा रहा है। दोनों रेडियो स्टेशन का मकसद समाज में शिक्षा का प्रचार-प्रसार, सामाजिक बुराइयां खत्म करने के लिए जागरूकता का संदेश देना और समाज के प्रबुद्ध लोगों, शहर के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों, कलाकारों, अभिनेताओं, गायकों को साथ जोड़ कर स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देना है। इन सबके साथ-साथ इनके माध्यम से मनोरंजन भी खूब किया जा रहा है। विश्व रेडियो दिवस की पूर्व संध्या पर इन रेडियो स्टेशनों पर कार्यरत आरजे ने रेडियो की बदली हुई भूमिका और खुद को श्रोताओं की मांग के अनुरूप ढालने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दैनिक जागरण संग साझा की। रेडियो एक ऐसा माध्यम है, जहां आप चाहो वहीं आपको एंटरटेनमेंट का डोज मिल सकता है। चलते-फिरते, उठते-बैठते हर जगह। आज आरजे को खूब अध्ययन करना पड़ता है। आज भी हमारे सामने पुराने गीतों की फरमाइश खूब आती है। मन्ना डे, किशोर दा, रफी साहब, लता जी और चूंकि अगले दो दिनों तक वेलेंटाइन डे का खुमार रहेगा, तो पुरानी आशिकी के गीतों की खूब मांग आती है।
आरजे गीत हमारे शहर में पंजाबी समुदाय से जुड़े लोग बड़ी संख्या में हैं। उनकी पसंद के अनुरूप गीतों की प्रस्तुति के लिए खुद को तैयार करने में खूब मेहनत होती है। मुझे खुशी है कि गुरदास मान और सतिदर सरताज के साथ-साथ पंजाबी क्वीन सुरेंद्र कौर व प्रकाश कौर के गीतों की खूब फरमाइश आती है। आरजे आनंद मेरे शो का नाम जी ले जरा है। मैं रेडियो के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने वाली कहानियां सुनाती हूं, साथ में उनसे संबंधित गीत बजा कर उनका दिल बहलाती हूं। रेडियो की भूमिका आज भी सार्थक है आरजे आनंद मेरे शो का नाम जी ले जरा है। मैं रेडियो के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने वाली कहानियां सुनाती हूं, साथ में उनसे संबंधित गीत बजा कर उनका दिल बहलाती हूं। रेडियो की भूमिका आज भी सार्थक है। आरजे गीत हमारे शहर में पंजाबी समुदाय से जुड़े लोग बड़ी संख्या में हैं। उनकी पसंद के अनुरूप गीतों की प्रस्तुति के लिए खुद को तैयार करने में खूब मेहनत होती है। मुझे खुशी है कि गुरदास मान और सतिदर सरताज के साथ-साथ पंजाबी क्वीन सुरेंद्र कौर व प्रकाश कौर के गीतों की खूब फरमाइश आती है। आरजे मौनिक आजाद कम्युनिटी रेडियो आम और खास दोनों को करीब लाया है। इस रेडियो के माध्यम से एक किसान-मजदूर भी अपनी बात कहने आता है और एक स्कूल व कालेज का प्रिसिपल भी। हमें जनता के साथ बड़ी गहराई से जुड़ने का मौका मिला है। रेडियो का महत्व कम नहीं हुआ है।आरजे दीक्षा भास्कर भाटिया शिक्षा का प्रचार-प्रसार और समाजिकता का संदेश देने के मकसद से डा.ओपी भल्ला ने वर्ष 2008 में रेडियो मानव रचना की शुरुआत की थी। हमें खुशी है कि अपने कम्युनिटी रेडियो के माध्यम से दूर-दराज तक संदेश पहुंचाने में सफल हो रहे हैं। डा.प्रशांत भल्ला, अध्यक्ष, मानव रचना शिक्षण संस्थान हमारे शहर के लोगों में सामाजिकता कूट-कूट कर भरी हुई है। इसका और विस्तार हो और स्वस्थ व सुशिक्षित समाज के निर्माण में अधिक से अधिक लोग योगदान दे सकें, इसी मकसद से रेडियो महारानी की शुरुआत की गई है। बीआर भाटिया, चेयरमैन, सी.दास.ग्रुप आफ कंपनीज मैंने जब से होशा संभाला है, तब से रेडियो सुन रहा हूं। हवा महल, बिनाका और बाद में सिबाका गीत माला के जरिए हर दिल अजीज अमीन सयानी की आवाज और पुराने गीत, रेडियो पर जसदेव सिंह की आवाज में हाकी की कमेंट्री को भला कौन भूल सकता है।
