फरीदाबाद : बदलती जीवनशैली रहन-सहन खान-पान के तौर-तरीकों में बदलाव या इस भाग दौड़ में हम कभी यह नहीं सोच पाते इसके पीछे स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना है, समय परिवर्तनशील है, और यदि आगे बढ़ना है तो हमें समय के साथ भी चलना होगा, लेकिन कुछ बातों को ध्यान में रखकर कहीं ऐसा ना हो इस भागदौड़ जिंदगी में अपनी सबसे अनमोल चीज ही ना खो दे, समय टेक्नोलॉजी का है, लेकिन जब एक लिमिट से ज्यादा उसका इस्तेमाल किया जाता है तो कहीं ना कहीं और घातक भी होता है, मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल वर्तमान समय में लोगों को मानसिक रोगी बना रहा है, यह कहने में जरा भी संकोच नहीं होगा कि आने वाले 2 दशकों में हर घर में एक मानसिक रोगी हो सकता है, आज की जनरेशन मोबाइल फोन से उन बातों को जान रही है जिसे एक उम्र में आने के बाद जाना वह समझा जाता था, ऐसी बातें रोज अखबारों में छपती है,
अपने साक्षात्कार में दिए बयान, पर डॉ आशीष मौर्य चेयरमैन नवजीवन चैरिटेबल ट्रस्ट लाइफ़स्टाइल डिजीज एक्सपर्ट ने बताया आने वाली पीढ़ियां यदि मोबाइल का उपयोग करना कम नहीं करती,, यह सत्य है घर-घर में मानसिक रोगी हो सकता है, मोबाइल आज की जरूरत है यदि से लिमिट में रहकर करें उपयोग तो कहीं ना कहीं स्वास्थ्य के लिए हितकर रहेगा, टेक्नोलॉजी का उपयोग हम लिमिट में रहकर करें, लेकिन हर अच्छी बातों पीछे कहीं न कहीं कुछ बुरी बातें भी होती है, मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन जो कहीं न कहीं दिमागी रूप से हमें कमजोर करता है, जिसे चिड़चिड़ापन डिप्रेशन याददाश्त में कमी सोचने समझने की क्षमता में कमी आने लगती है, डॉक्टर मौर्य ने बताया यह बातें आप सभी के लिए हैं, सोच समझ के कह रहा हूं लोग हमारी बातें माने यह जरूरी नहीं, इसके बावजूद भी कहना चाहता हूं, परिवार में सभी एक ही साथ रहना भूल गए हैं, मां बाप बच्चे एक साथ अपने विचारों का आदान प्रदान करना उचित नहीं समझते, हर आदमी आज तनाव में जी रहा है, कहने का मतलब यह नहीं है कि हम टेक्नोलॉजी या समय के साथ ना चले पर जरूरत के हिसाब से,, दुनिया बदल रही है विचार आदत सोचने की समझ बदल रही है, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें लेकिन लिमिट में रहकर
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