हरियाणा की भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार बुधवार को विश्वास परीक्षा देगी। सरकार को एक बार फिर सदन में बहुमत साबित करना होगा। बता दें कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव के चलते प्रदेश में ये सियासी हालात पैदा हुए हैं। दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए कृषि कानूनों, शराब व रजिस्ट्री घोटाले, जहरीली शराब से 47 लोगों की मौत सहित कई मुद्दों पर कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव दिया है।
वहीं गठबंधन सरकार ने भी इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। दोनों पार्टियों भाजपा व जजपा के साथ विपक्षी दल कांग्रेस ने भी व्हिप जारी कर दिए गए है। वहीं आज की कार्यवाही के दौरान तीनों पार्टियों के सभी विधायकों को सदन में मौजूद रहना होगा। भाजपा-जजपा ने व्हिप में साफ कहा है कि कोई भी सदस्य सत्र की कार्यवाही पूरी होने तक सदन से बाहर नहीं जाएगा। इतना ही नहीं, उन्हें सरकार के समर्थन और अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि कांग्रेस की ओर से बजट सत्र के पहले ही दिन 5 मार्च को विधानसभा सचिवालय में अविश्वास प्रस्ताव दे दिया था। स्पीकर ने इसे स्वीकार कर लिया था और 10 मार्च को इस पर चर्चा व वोटिंग करवाने का फैसला सुनाया था।
विधानसभा संचालन नियमावली 65 के तहत सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ दिए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 18 विधायकों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। इसके उलट हुड्डा द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर कांग्रेस के 28 विधायकों ने हस्ताक्षर किए थे। प्रदीप चौधरी की कालका हलके से विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद इस समय सदन में कांग्रेस के 30 विधायक हैं। अविश्वास प्रस्ताव में कृषि कानूनों को रद्द करने, एपीएमसी एक्ट में संशोधन करके किसानों को एमएसपी की गारंटी प्रदान करने का मुद्दा उठाया गया है। इसी तरह से कथित शराब घोटाले, जहरीली शराब के कारण हुई 47 लोगों की मौत, प्रदेश में हुए रजिस्ट्री घोटाले को सरकार के खिलाफ अविश्वास का आधार बनाया है। पूर्व सीएम व विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दस मुद्दों के आधार पर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार पूरी तरह से चौकस है। सीएम मनोहर लाल खट्टर इस मुद्दे पर विधायक दल की बैठक भी ले चुके हैं।
व्हिप से बाहर जाने पर जाएगी सदस्यता
भाजपा व जजपा ने जिस तरह से व्हिप जारी करके उसमें शब्दों का इस्तेमाल किया है, उससे साफ है कि इसके खिलाफ जाने वालों की सदस्यता जाएगी। जजपा के चीफ व्हिप अमरजीत ढांडा ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि पूरी कार्यवाही के दौरान सदन में मौजूद रहना होगा और अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोटिंग करनी होगी। विधानसभा की नियमावाली के अनुसार, व्हिप जारी होने के बाद सभी का सदन में मौजूद रहना अनिवार्य है।
निर्दलीयों पर नजर
विधानसभा में निर्दलीय विधायकों की संख्या 7 है। इनमें से महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू व दादरी से निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान सरकार से समर्थन वापस ले चुके हैं। दोनों खुलकर किसान आंदोलन का भी समर्थन कर रहे हैं। बाकी पांच निर्दलीय विधायकों का सरकार के साथ पूरा समर्थन है। अब यह देखना रोचक रहेगा कि वोटिंग के दौरान निर्दलीय विधायक किस ओर जाते हैं।
आज होगा यह
अविश्वास प्रस्ताव के लिए कांग्रेस विधायक हाथ उठाकर समर्थन करेंगे। इसके बाद इस पर चर्चा होगी और फिर स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता वोटिंग करवाएंगे। बताते हैं कि पहले वाॅयस वोटिंग होगी। इससे स्पीकर अंदाजा लगाएंगे कि कितने विधायक प्रस्ताव के समर्थन में हैं और कितने खिलाफ। प्रस्ताव का समर्थन व विरोध करने वालों के हाथ खड़े करवाए जाएंगे। स्पीकर गिनती करने के लिए अपने स्टाफ की ड्यूटी लगाएंगे और काउंटिंग रिपोर्ट स्पीकर के पास आने के बाद वे वोटिंग के नतीजे सदन में घोषित करेंगे।
दलीय स्थिति
भाजपा 40
कांग्रेस 30
जजपा 10
हलोपा 01
निर्दलीय 07
कुल 88
