हरियाणा विधानसभा में बजट-सत्र के चौथे दिन की कार्यवाही में विधानसभा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों के मुद्दे पर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखा । उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पढ़ा और सीक्रेट वोटिंग करवाने की मांग की। उन्होंने कहा हम मनोहर लाल के नेतृत्व वाले हरियाणा मंत्रिमंडल में अविश्वास व्यक्त करते हैं। ये सरकार बहुमत की सरकार नहीं है। हुड्डा ने कहा 2019 में बीजेपी को बहुमत नहीं मिला था। एक दूसरी पार्टी की बैसाखियों पर ये सरकार बनी है जो यमुना पार पहुंचाने की बात कहने वाली पार्टी आज इनकी सहयोगी है। दुष्यंत चौटाला बताएं कि वे जनता और किसानों को बहकाने काम कर रहे हैं क्या…? इस दौरान उन्होंने ने कहा ये सरकार लोगों का पूर्ण रूप से विश्वास खो चुकी है । सरकार के प्रतिनिधि गांवों और अपने हलके में भी नहीं जा सकते है इस सरकार की तुलना मुगल के आखिरी शासक शाह आलम से की जा रही है । मनोहर सरकार का सिलसिला आज चंडीगढ़ से पंचकूला तक सीमित है।
मुख्यमंत्री पानीपत में 26 जनवरी को झंडा फहराने भी नहीं जा सके थे। प्रजातंत्र में वाद-विवाद, संवाद और समाधान के तरीके होते है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि एमएसपी की गारंटी का प्राइवेट बिल अस्वीकार कर दिया गया। हुड्डा ने कहा हमने मंडी एक्ट में संशोधन कर एमएसपी से कम की खरीद पर सजा के प्रावधान की मांग की थी। हरियाणा को छोड़कर किसी भी राज्य की सरकार ने किसानों को दिल्ली जाने से नहीं रोका है। हरियाणा सरकार ने सर्दी में उन पर पानी की बौछार, लाठीचार्ज, आंसू गैस और सड़क तक खुदवाई। हरियाणा सरकार ने पुलिस को बांस की लाठियों की जगह लोहे की लाठियां दी।
उन्होंने कहा जेजेपी के घोषणा पत्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीदने का कानून बनाने और फसल की खरीद पर 10 प्रतिशत और 100 रुपये बोनस देने का कानून बनाने का वादा किया गया था। बीजेपी ने 2014 में किसानों की फसल के दाम 50 प्रतिशत मुनाफे के साथ और 2019 में हर फसल की खरीद न्यूनतम समर्थऩ मूल्य पर सुनिश्च करने और दोगुना आदमनी करने की बात कही थी। कहां गया न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद का वायदा? हुड्डा ने कहा घोटालों की भी लाइन लगी हुई है। गिरदावरी घोटाला, मुआवजा घोटाला, रैक्सीस दवा खरीद घोटाला, बावल भूमि अवार्ड घोटाला, सस्वती कुंज घोटाला, फसल बीमा घोटाला, भूमि अधिग्रहण घोटाला, मीटर खरीद घोटाला, अवैध माइनिंग घोटाला, गुरुग्राम मेट्रो रूट बदलाव घोटाला, रोडवेज घोटाला, आटा घोटाला, शराब घोटाला, धान घोटाला, रजिस्ट्री घोटाला।
