पलवल : कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे पर अटोंहा के पास धरने पर बैठे किसान अब 26 मार्च को रेलवे लाइन और नेशनल हाईवे जाम करेंगे। इस बाबत किसानों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। गुरुवार को धरनास्थल पर हुई किसानों की बैठक में मार्च महीने में कई गतिविधियां करने का फैसला किया।
किसान नेता महेंद्र चौहान ने बताया कि मथुरा से हजारों किसानों की यात्रा 19 मार्च को शुरू होगी। यह यात्रा 21 मार्च को पलवल जिला में प्रवेश करेगी और प्रवेश के दौरान यात्रियों का स्वागत किया जाएगा। यात्रा 23 मार्च को धरना स्थल पर पहुंचेंगी। धरनास्थल पर यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था होगी। यात्रा के दौरान किसानों को धरना स्थल पर पहुंचने के लिए कहा गया है। किसान आंदोलन को और तेज करने के लिए बुजुर्ग किसानों को कहा गया है कि वे धरना स्थल पर आएं और युवा किसान खेतों में काम करें। उन्होंने बताया कि 15 मार्च को निजीकरण नीतियों के विरोध में धरना होगा। इस दौरान कर्मचारियों को भी आमंत्रित किया जाएगा। आने वाली 19 मार्च क मंडी और खेती बचाओ कार्यक्रम होगा। इस दिन आढ़तियों को आमंत्रित किया जाएगा। शहीदे आजम भगत सिंह का शहीदी दिवस 23 मार्च को मनाया जाएगा। 26 मार्च को एक बार फिर रेल और सडक़ जाम करेंगे। होली से एक दिन पहले 28 मार्च को केन्द्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाएंगे। धरना स्थल पर 29 व 30 मार्च को होली और धुलैंडी मनाई जाएगी। गुरुवार को धरने की अध्यक्षता दीपक चौधरी ने की ओर संचालन ज्ञान सिंह चौहान ने किया। गीत के जरिए विरोध रबी फसल की कटाई शुरू होने के साथ धरनास्थल पर भीड़ जुटाना चुनौती बन गया है। पहले के मुकाबले किसानों की भीड़ कम होने लगी है। हालांकि किसानों ने भीड़ को जुटाने के लिए होली और धुलैंडी तक के कार्यक्रम तय कर लिए हैं। दीघौट गांव की चौपाई पार्टी ने गीतों के जरिये कृषि कानूनों का विरोध किया। गुरुवार को बीर सिंह दीघौट, महेन्द्र सिंह चौहान, राजकुमार औलिहान, सुंदर सिंह वकील, सोहनपाल चौहान, हरप्रसाद औरंगाबाद, पोहप सिंह स्यारौली, इन्द्र सिंह रावत, राजेन्द्र सिंह घर्रोट आदि ने किसानों को संबोधित किया
