फरीदाबाद : केंद्रीय वन मंत्रालय की ओर से बड़खल झील में खड़ी कीकर-झाड़ियों को वन क्षेत्र की संज्ञा दे दी गई है। ऐसे में इन झाड़ियों और कीकर की कटाई पर रोक लग गई है। मामला अब केंद्रीय वन मंत्रालय में अटक गया है। इस कारण ऐतिहासिक बड़खल झील में खड़ी झाड़ियों की कटाई कर पानी भरने के लिए अनापत्ति (नो-ऑब्जेक्शन) प्रमाण पत्र भी जारी नहीं हो पा रहा। अब झील के जीर्णोद्धार का जिम्मा उठा रही फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड कानूनी मदद लेकर परियोजना को पार लगाने की तैयारी में है।
सत्तर के दशक में बड़खल झील पर्यटन स्थल के लिए विकसित किया गया था, इसके लिए अनखीर और बड़खल गांव की करीब चार सौ एकड़ राजस्व संपदा को हरियाणा पर्यटन विभाग को ट्रांसफर करना पड़ा था। 90 के दशक में झील दिल्ली-एनसीआर के लिए हॉट टूरिस्ट प्लेस थी। लेकिन अरावली की पहाड़ियों में जलदोहन होता चला गया। वर्ष 2000 तक झील सूखने की कगार पर पहुंची और साल 2004 में पूरी तरह से सूखे क्षेत्र में बदल गई।
तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2012 से कागजों में फिर से इसके जीर्णोद्धार की शुरुआत की। हालांकि योजना धरातल पर नहीं आ सकी। वर्ष 2014 में इसका जिम्मा स्मार्ट सिटी लिमिटेड को सौंप दिया गया। साल 2017 में इस पर काम शुरू हुआ तो सर्वे के लिए आईआईटी रूड़की की टीम फरीदाबाद पहुंची। टीम के सुझाव पर फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने विस्तृत प्रोजेक्ट तैयार किया। इसमें सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) से पानी ट्रीट कर झील में पहुंचाने पर सहमति बनी। करीब 30 करोड़ की लागत से योजना को अंजाम दिया जाना है। झील के अस्तित्व का पता लगाने के लिए मांगे कागजात केंद्रीय वन मंत्रालय ने फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड (एफएससीएल) से बड़खल व अनखीर गांव की पंचायत जमीन को हरियाणा पर्यटन विभाग को ट्रांसफर किए जाने संबंधी कागजात मांगे हैं, जिससे बड़खल झील पर्यटन स्थल के अस्तित्व के बारे में सही पता चल सके। ऐसा न होने पर एफएससीएल को करीब 22 करोड़ रुपये और बड़ी मात्रा में पौधरोपण करना होगा। वहीं, बड़खल झील पर बना करीब छह दशक पुराना बांध भी अब जर्जर हो चुका है। इसलिए झील भरने से पहले बांध का निर्माण मुंबई के मरीन ड्राइव की तर्ज पर किया जाएगा। करीब 700 मीटर लंबे इस बांध को करीब 50 फुट चौड़ा किए जाने की योजना है। इसे झील की तरफ चौड़ाई में बढ़ाया जाएगा। विश्व स्तरीय होगा सौंदर्यीकरण मरीन ड्राइव का सौंदर्यीकरण विश्व स्तरीय होगा। बांध को आधुनिक तकनीक के साथ रिटेनिंग वॉल के माध्यम से बनाया जाएगा। इस पर करीब 22 करोड़ रुपये की लागत आएगी। बच्चों के लिए झूले, रेस्त्रां, जूस कॉर्नर, वॉकिंग ट्रैक सुविधाएं यहां होंगी। योगाभ्यास, व्यायाम करने की सुविधा मिलेगी। फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड को साबित करना है कि बड़खल झील में खड़े कीकर और झाड़ियों को वन क्षेत्र है या नहीं है। मंत्रालय ने कहा है कि वन विभाग में करीब 22 करोड़ रुपये जमा करने होंगे तभी कीकर और झाड़ियों को काटने की मंजूरी दे सकते हैं। इसलिए एफएससीएल ने इस मामले में कानूनी सहायता लेने की तैयारी की है।
