रुड़की में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उन्हें याद किया गया। स्वामी विवेकानंद को भारतीय संस्कृति का प्रतीक बताते हुए कहा गया कि उनके विचार हमेशा प्रसांगिक बने रहेंगे।हरमिलाप धर्मशाला में संस्कार भारती रुड़की और रामकृष्ण सेवाश्रम समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हरिद्वार से आए स्वामी रूपेंद्र प्रकाश ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने सोए हुए देश को जगाया और देश की संस्कृति का डंका अपनी ओजस्वी वाणी के माध्यम से पूरे विश्व में फैलाया। 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में उन्होंने सबका दिल जीता और भारती की वसुधैव कुटुम्बकम की अवराधरणा को चरितार्थ किया।
उन्होंने मनुष्य को यह सोचने पर विवश किया कि उसके भीतर सर्वशक्तिमान परमात्मा विराजमान है तो वह कमजोर कैसे हो सकता है। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. प्रेम चंद शास्त्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद आज भी भारत की महान संस्कृति के वैश्विक अंबेसडर हैं। उनके विचार आज भी वायुमंडल में गूंजते हैं। उनकी प्रेरणा से सैकड़ों अस्पताल बीमार और गरीब लोगों की सेवा में लगे हैं। जहां नर सेवा ही नारायण सेवा के रूप में आज भी दिखाई देती है। मुख्य शिक्षाधिकारी डॉ. आनंद भारद्वाज ने कहा कि विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद का जीवन अवश्य पढ़ना चाहिए। उनके प्रेरक विचार उन्हें आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शशांक ने सभी विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद से जुड़ा साहित्य वितरित किया और इस साहित्य को पढ़ने का आग्रह किया। इस दौरान मेयर गौरव गोयल, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री डॉ. विनोद आर्य, जिला संघ चालक प्रवीण गर्ग, डॉ. नवीन अग्रोही ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में संस्कार भारती के प्रदेश सचिव डॉ. राजकुमार उपाध्याय, कार्यक्रम संयोजक अशोक शर्मा आर्य, डॉ. प्रवीण रोड़, नरेंद्र आहूजा, मनीषा श्रीवास्तव, विवेक कांबोज, शंकर सिंह, दिनेश कुमार, संगीता श्रीवास्वत, गौरव यादव, पार्वती पांडेय, सुशील रावत, विकास कुमार, शुभम, केपी सिंह, रामवीर सिंह, डॉ. कमलेश चंद्र, अनुपमा गुप्ता, भावना शर्मा, नीलम मधोक, अरुण कुमार शर्मा, समय सिंह सैनी, आंचल शर्मा, नंद किशोर कश्यप आदि मौजूद रहे।
