फ़रीदाबाद : [पत्रकार मिथलेश मिश्रा ] आजादी का अमृत महोत्सव अर्थात आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर शिक्षा विभाग हरियाणा के आदेशानुसार राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद में प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में मनाया जा रहे अमृत महाेत्सव में आज संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जूनियर रेडक्रॉस, सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड प्रभारी प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा ने कहा कि आजादी के 75 साल पूरे होने के अवसर पर छात्राओं और युवाओं को आजादी के संघर्षों, स्वतंत्रता रूपी यज्ञ में प्राणों की आहुति देने वाले वीरों और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से परिचित करवाने एवं विद्यार्थियों को देशप्रेम की भावना से ओत प्रोत करने के उद्देश्य से अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। अमृत महोत्सव को लेकर आज विद्यालय में छात्राओं की संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी के दौरान विद्यालय के अध्यापकों शर्मीला और शीतू एवं प्रधानाचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा ने एवं छात्राओं ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की यात्रा तथा आजादी के बाद चल रही विकास यात्रा के बारे में विस्तृत जानकारी दी। संगोष्ठी में छात्राओं ने भी अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए कार्यक्रम के बारे में प्रधानाचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा ने बताया कि आजादी के 75 वर्षगांठ के अवसर पर देश हुआ आजाद, अब स्वतंत्र सोच की बारी है एवं हर मन का उत्सव, आजादी का अमृत महोत्सव, आजादी ले आए तुम, आजादी से प्यार करो आदि विषयों पर छात्राओं ने अपना कौशल प्रस्तुत किया। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा ने कहा कि आज़ाद आदमी के अंदर कुछ सोचने, फैसला करने और अपने फैसले पर अमल करने की दिलेरी होती है। गुलाम व्यक्ति यह दिलेरी खो चुका होता है। वह हमेशा दूसरे के विचारों को अपनाता है, घिसे-पिटे रास्तों पर चलता है। उस समय लोग ये सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि अपने जीवनकाल में वे देश को आज़ाद हुआ देख सकेंगे। परंतु गांधीजी को खुद पर, अपने विचारों और अपने देशवासियों पर भरोसा था। शायद आपमें से किसी ने नंदलाल बोस द्वारा चित्रित गांधीजी का चित्र देखा होगा। वह एक ऐसे व्यक्ति का चित्र है, जिसमें सोचने का साहस था और उस सोच पर अमल करने की हिम्मत थी। आज हमारे देश को आज़ाद हुए 74 वर्ष हो गए हैं। इस समय हम आज़ादी के 75वीं जयंती मना रहे हैं पर क्या हम कह सकते हैं कि गुलामी और हीनता का भाव हमारे मन से बिल्कुल दूर हो चुका है क्या हम दावा कर सकते हैं कि व्यक्तिगत, सामाजिक या राष्ट्रीय स्तर पर हमारे विचार, हमारे फैसले और हमारे काम मूलतः हमारे अपने हैं और हमने दूसरों की नकल करनी छोड़ दी है। क्या हम स्वयं अपने लिए फैसले लेकर उन पर अमल कर सकते हैं या फिर हम यूं ही इस नकली स्वतंत्रता का दिखावा करते रहेंगे। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा ने कहा कि हमारी आजादी को बनाए रखने का दायित्व हम सभी पर है विशेष कर शिक्षा के प्रचार से वंचित वर्ग को भी शिक्षित बना कर आजादी के अमृत महोत्सव में सम्मिलित कर जश्न मनाने का अवसर प्रदान करवाएं।
