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Home » इतिहास के सुनहरे अक्षरों में लिखा है वीरांगना अवंतीबाई लोधी का नाम  : रीतिक वधवा

इतिहास के सुनहरे अक्षरों में लिखा है वीरांगना अवंतीबाई लोधी का नाम  : रीतिक वधवा

faridabadnews24By faridabadnews24March 20, 2021No Comments4 Mins Read

भिवानी : भारत में पुरुषों के साथ आर्य ललनाओं ने भी देश, राज्य और धर्म, संस्कृति की रक्षा के लिए आवश्यकता पडने पर अपने प्राणों की बाजी लगाई है। गोंडंवाने की रानी दुर्गावती और झाँसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई के चरण चिन्हों का अनुकरण करते हुए रामगढ (जनपद मंडला- मध्य प्रदेश) की रानी वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी ने सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रेंजो से खुलकर लोहा लिया था और अंत में भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी थी। वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 को मनकेहणी के जमींदार राव जुझार सिंह के यहां हुआ था। 20 मार्च 1858 को इस वीरांगना ने रानी दुर्गावती का अनुकरण करते हुए युध्द लड़ते हुए अपने आप को चारो तरफ से घिरता देख स्वंय तलवार भोंक कर देश के लिए बलिदान दे दिया।

आज वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी के बलिदान दिवस पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की !  श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भाजपा नेता एवं इंडिया स्पोर्टस संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रीतिक वधवा एवं रमेश चौधरी ने कहा कि वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी ने अपने सीने तलवार भोकते वक्त कहा कि ‘‘हमारी दुर्गावती ने जीते जी वैरी के हाथ से अंग न छुए जाने का प्रण लिया था। इसे न भूलना बड़ों‘‘। उनकी यह बात भी भविष्य के लिए अनुकरणीय बन गई। वीरांगना अवंतीबाई का अनुकरण करते हुए उनकी दासी ने भी तलवार भोक कर अपना बलिदान दे दिया और भारत के इतिहास में इस वीरांगना अवंतीबाई ने सुनहरे अक्षरों में अपना नाम लिख दिया। उन्होंने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी ने वीरांगना झांसी की रानी की तरह ही अपने पति विक्रमादित्य के अस्वस्थ होने पर ऐसी दशा में राज्य कार्य संभाल कर अपनी सुयोग्यता का परिचय दिया !  सन 1857 में जब देश में स्वतंत्रता संग्राम छिड़ा तो क्रान्तिकारियों का सन्देश रामगढ भी पहुंचा।  रानी ने अपनी ओर से क्रान्ति का सन्देश देने के लिए अपने आसपास के सभी राजाओं और प्रमुख जमीदारों को चिट्ठी के साथ कांच की चूड़ियां भिजवाई उस चिट्ठी में लिखा था। ‘‘देश की रक्षा करने के लिए या तो कमर कसो ऐ चूड़ी पहनकर कर मैं बैठो तुम्हे धर्म ईमान की सौगंध जो इस कागज का सही पता बैरी को दो‘‘उन्होंने कहा कि सभी देश भक्त राजाओं और जमीदारों ने रानी के साहस और शौर्य की बड़ी सराहना की और उनकी योजनानुसार अंग्रेंजों के खिलाफ विद्रोह का झंडा खडा कर दिया। जगह-जगह गुप्त सभाएं कर देश में सर्वत्र क्रान्ति की ज्वाला फैला दी। रानी ने अपने राज्य से कोर्ट ऑफ वार्ड्स के अधिकारियों को भगा दिया और राज्य एवं क्रान्ति की बागडोर अपने हाथो में ले ली।  अंग्रेजों से अपने देश की स्वतंत्रता और हक के लिए लड़ी थी। जब रानी वीरांगना अवंतीबाई अपनी मृत्युशैया पर थी तो इस वीरांगना ने अंग्रेज अफसर को अपना बयान देते हुए कहा कि ‘‘ग्रामीण क्षेत्र के लोगो को मैंने ही विद्रोह के लिए उकसाया, भड़काया था उनकी प्रजा बिलकुल निर्दोष है‘‘। ऐसा कर वीरांगना अवंतीबाई लोधी ने हजारो लोगों को फांसी और अंग्रेजों के अमानवीय व्यवहार से बचा लिया। मरते-मरते ऐसा कर वीरांगना अवंतिबाई लोधी ने अपनी वीरता की एक और मिसाल पेश की। उन्होंने कहा कि धन्य है वह वीरांगना जिसने एक अद्वितीय उदहारण प्रस्तुत कर 1857 के भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में 20 मार्च 1858 को अपने प्राणों की आहुति दे दी। ऐसी वीरांगना का देश की सभी नारियो और पुरुषों को अनुकरण करना चाहिए। 20 मार्च 2017 को ऐसी आर्य वीरांगना के बलिदान दिवस पर उनको शत्-शत् नमन और श्रद्धांजलि।इस अवसर पर  रमेश चौधरी  , इमरान बापोड़ा , पंकज शर्मा , डॉ योगेश , संदीप कुमार, विनोद कुमार,  अमित कुमार, अनिल कुमार, नवीन शर्मा, गुलशन, जोगेन्द्र,ने भी वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी के बलिदान दिवस पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की 

faridabadnews faridabadnews24 Veerangana Avantibai Lodhi's name is written in the golden letters of history: Reetik Wadhwa
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