दुनियाभर में दिल से जुड़ीं बीमारियां मृत्यु की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है. बढ़ती उम्र के साथ-साथ दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. 50 वर्ष के बाद ये समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. अक्सर हमारे माता-पिता भी अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार ऐसा करना घातक साबित हो सकता है. अगर उन्हें सांस लेने में दिक्कत है या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या के लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें. आप अपने माता-पिता के व्यवहार और बॉडी लैंग्वेज से दिल के बीमारी के लक्षणों का पता लगा सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसे कुछ लक्षणों के बारे में….

हाई ब्लड प्रेशर– इन दिनों हाई ब्लड प्रेशर की समस्या लोगों में कॉमन हो गई है. 50 वर्ष से ऊपर की उम्र के बाद इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. आप अपने पैरेंट्स का हर हफ्ते या 15 दिनों के अंदर डिजिटल ब्लड प्रेशर मापने वाली मशीन की मदद से ब्लड प्रेशर चैक कर सकते हैं. यदि आपके माता-पिता उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, तो आपको नियमित रूप से जांच करानी चाहिए. अनियंत्रित उच्च रक्तचाप आपके दिल को कठोर बना सकता है जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.
हाई ब्लड शुगर- हाई ब्लड शुगर से कोरोनरी आर्टरी डीसीज का खतरा बढ़ जाता है. दरअसल, ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ने से कोरोनरी धमनी संकरी हो जाती हैं. इससे रक्त वाहिकाओं के फंक्शन में रुकावट आ जाती है. इसलिए समय-समय पर ब्लड शुगर लेवल की जांच करना हृदय को स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.
सीने में दर्द– कई बार आपके माता-पिता और यहां तक कि आप भी सीने में होने वाले दर्द को गैस या एसिडिटी मानकर अनदेखा कर देते हैं. अगर आपके पैरेंट्स को छाती में दर्द या दबाव महसूस होता है तो यह दिल का दौरा पड़ने का संकेत हो सकता है. इसके अलावा, आर्टरी में ब्लॉकेज होने के कारण भी सीने में दर्द हो सकता है. इन लक्षणों को नजरअंदाज ना करें और तुरंत डॉक्टर की सलाह लें. ऐसा बहुत कम मामलों में होता है कि किसी को सीने में दर्द के बिना ही हार्ट अटैक आ जाए.
गले और जबड़े का दर्द– यदि आपके माता-पिता को सीने में दर्द होता है जो उनके गले और जबड़े तक फैलता है, तो यह दिल के दौरे का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है.
