कोरोना महामारी को लेकर किसान आंदोलन में धरने पर बैठे किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। किसानों को लॉकडाउन की आहट सुनाई दे रही है। किसानों को चिंता है कि सरकार किसान आंदोलन को कमजोर करने के लिए आंदोलन स्थल पर धारा 144 या संपूर्ण लॉकडाउन लगाने जैसा कदम उठा सकती है। इसी वजह से आंदोलन कर रही खाप पंचायतों ने 3 महीने का एडवांस राशन मंगा लिया है। इससे वे सरकार के किसी भी निर्णय का डटकर मुकाबला कर सकें।
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने आंदोलन को समाप्त करने के लिए ऑपरेशन क्लीन बनाया था, जिसके खिलाफ किसानों ने ऑपरेशन शक्ति बना लिया है। कुंडली, गाजीपुर व टिकरी अब केवल दिल्ली के बॉर्डर नही है, यहां अब किसानों के गांव बस चुके हैं। सरकार किसी किसान से उनका गांव खाली नही करा सकती।
सरकार को जितनी ताकत किसानों का आंदोलन बदनाम करने में लगानी पड़ रही है, यदि इससे आधी ताकत भी किसानों की मांगों को स्वीकार करने में लगा देती तो आज किसान अपने गांव में सुरक्षित लौट चुका होता। सरकार यदि जिद्द पर अडिग है तो किसान भी अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए यहां आया है।
देश का किसान अब न कमजोर है और न मजबूर है। वहीं, किसान आंदोलन में शामिल खाप पंचायतों को भी लॉकडाउन-2 का खतरा नजर आ रहा है। इसलिए उन्होंने तीन महीने का एडवांस राशन मंगा लिया है। बुधवार को करनाल के किसान व गोल्डन हट रिसोर्ट के संचालक रामसिंह राणा ने 1 करोड़ 25 लाख की लागत से 11 हजार मयूर जग से किसान आंदोलन में फ्री जल सेवा करने का संकल्प लिया।
