दिल्ली : दिल्ली निवासी नीतीश कुमार को लगभग दो दिनों तक अपनी मां की लाश अपने घर में रखनी पड़ी, क्योंकि वह दो दिनों तक दिल्ली के शवदाहगृहों में अपनी मां के अंतिम संस्कार के लिए जगह तलाशते रहे, लेकिन उन्हें जगह नहीं मिली। फिर गुरुवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में शवदाहगृह से सटे एक पार्किंग वाली जगह में जहां अंतिम संस्कार का इंतजाम किया गया था, वहां उन्होंने अपनी मां का अंतिम संस्कार किया।
कुमार ने कहा, ‘मैं मां के अंतिम संस्कार के लिए कई शवदाहगृहों में गया, लेकिन कहीं लकड़ियां नहीं थीं तो कहीं सामग्री नहीं थी।’ ये हाल खाली दिल्ली का नहीं कई राज्यों का है। भारत में कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों की संख्या इस हद तक बढ़ गई है कि शहदाहगृह में अपनों की लाश का अंतिम संस्कार करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन श्मशान घाटों में इतनी लाशें एक साथ जलेंगी की और लाशों को जलाने तक की जगह नहीं होगी।
वाकई ये मंजर रौंगटे खड़े कर देने वाला है। यह एक तरह से प्रलय का संकेत है। दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में कोरोना के केसों में बेहिसाब वृद्धि हुई है। गुरुवार को भारत में कोरोना के 3,14,835 नए मामले सामने आए। अगर राजधानी दिल्ली की बात करें तो वहां प्रतिदिन कोरोना के लगभग 26,000 नए मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों की बजह से दिल्ली के अस्पताल ऑक्सीजन, स्वस्थ्य देखभाल उपकरणों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। कुल मिलाकर कोरोना के बढ़ते मामलों ने देश के स्वास्थ्य ढांचे को चकमराकर रख दिया है।
लोग रोज अपने प्रियजनों को खो रहे हैं। चारों तरफ तबाई का मंजर दिखाई दे रहा है। पिछले 24 घंटे में दिल्ली में 306 लोगों की कोरोना के कारण मौत हुई है। शवदाहगृह एक दम फुल चल रहे हैं यहां तक की लोगों को शवों के अंतिम संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। जितेंद्र सिंह शॉन्टी जो शहीद भगत सिंह सेवा दल नाम से एक गैर लाभकारी स्वास्थ्य सेवा का संचालन करते हैं, कहते हैं कि अंतिम संस्कार के लिए शवदाहगृह से अलग पार्किंग में अंतिम संस्कार के लिए जो व्यवस्था की गई हैं वहां शुक्रवार को 60 शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जबकि 15 अभी भी कतार में खड़ी हैं। शॉन्टी ने नम आंखों से कहा कि दिल्ली ने पहले ऐसा भयानक मंजर कभी नहीं देखा। 5,15 और 25 साल तक के बच्चों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। नए शादीशुदा जोड़ों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। यह सब देखना काफी दर्दनाक है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल कोरोना की पहली लहर के दौरान उन्होंने एक दिन में अधिकतम 18 लाशों का अंतिम संस्कार किया था। जबकि वह औसतल 10 लाशों का अंतिम संस्कार लगभग रोजाना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को केवल एक ही शवदाहगृह में 78 लाशों को जलाया गया। उन्होंने आगे कहा कि 10 दिन पहले उनकी मां का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया था, उस समय उनकी मां को अस्पताल में बेड तक नहीं मिल पाया था। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ भी नहीं कर रही है। केवल आप ही अपने परिवार को बचा सकते हैं।
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