कोरोना की तीसरी लहर बेहद खतरनाक होती जा रही है। मरीजों की घुटती सांसें बचाने के लिए अस्पतालों को ऑक्सीजन की कमी से जूझते देखा जा सकता है। इसी बीच रविवार रात को हिसार के एक निजी अस्पताल में भी 5 कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई। इसके बाद मृतकों के परिजन अस्पताल को तो अस्पताल प्रबंधन सरकार को कोसता नजर आ रहा है। सोमवार सुबह अस्पताल में खासा हंगामा हुआ है।
मामला हिसार के सोनी बर्न अस्पताल का है। बीते दिन यहां पंजाब के मानसा जिले के गांव हाजीवाला निवासी अरविंद (60), हिसार जिले के गांव ढाणी खान बहादुर के 45 वर्षीय राजेश्वर, गांव भाना के 26 वर्षीय सितेंद्र, उकलाना के 67 वर्षीय राजे राम और दिल्ली के धर्म कॉलोनी निवासी अनिल कुमार को कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया था। ये सभी वेंटिलेटर पर थे। रविवार आधी रात के करीब अचानक अस्पताल में मौजूद 7 ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गए।
चार घंटे की जद्दोजहद के बाद बड़ी मुश्किल से 2 सिलेंडर मिल पाए और जब तक इन्हें लगाया गया, एक-एक करके पांचों की सांसें थम गई। इसके बद सोमवार सुबह मृतकों के परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाया है, वहीं इस बारे में अस्पताल के मालिक डॉ. रजत सोनी का कहना है कि उनकी तरफ से किसी भी तरह की कोई ढील नहीं बरती गई।
डॉ. सोनी के मुताबिक, ‘अस्पताल में 22 में से 15 बैड कोविड पेशेंट्स के लिए समर्पित किए गए हैं। 7 ऑक्सीजन सिलेंडर भी हैं, लेकिन वक्त पर प्लांट से सप्लाई ही नहीं मिल पाए तो हम क्या कर सकते हैं’। डॉ. सोनी ने बताया कि रविवार रात करीब 12 अचानक ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गए। जब ऑक्सीजन लेने के लिए टीम को प्लांट में भेजा तो वहां पहले से ही लंबी लाइन लगी हुई थी। सुबह 4 बजे तक उनकी टीम को ऑक्सीजन नहीं मिली और प्लांट को शट डाउन कर दिया गया। बड़ी मुश्किल से इधर-उधर से 2 सिलेंडर का जुगाड़ हो पाया, लेकिन तब तक यहां 5 मरीजों की सांस थम चुकी थी। इस संबंध में सरकार को सोचना चाहिए।
तैयारी: 6 ऑक्सीजन प्लांट लगने थे, अब तक सिर्फ एक ही शुरू हो सका
- पंचकूला : जनवरी से बन रहे ऑक्सीजन प्लांट का काम अभी तक अधूरा है। इसके शुरू हाेने पर राेज 4 लाख क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन तैयार हाेगी।
- फरीदाबाद : बीके अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगना था। चार माह बाद भी शुरू नहीं हुआ। अब भी जल्द शुरू करने की बात की जा रही है।
- सोनीपत : ऑक्सीजन प्लांट लगाने की प्लान जनवरी में बना। कब तक शुरू होगा, यह अधिकारी भी नहीं बता पा रहे।
- हिसार : 4 माह पहले प्लांट लगाने के आदेश हुए। अब सोमवार को प्लांट शुरू करने का दावा किया है।
- करनाल : नागरिक अस्पताल में भी ऑक्सीजन प्लांट अब तक नहीं लग पाया है। 400 किलोवाट का प्लांट लगना है।
- अम्बाला : अम्बाला के साहा में ऑक्सीजन प्लांट लग चुका है।
- अब गुड़गांव व कुरुक्षेत्र के जिला अस्पतालों में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाने की अनुमति केंद्र से मिली है।
क्या किया जाना चाहिए
- सरकार हर जिले में एक पोर्टल/एप क्यों नहीं तैयार करती? इस पर अस्पताल उपलब्ध ऑक्सीजन, गंभीर मरीजों की संख्या, मरीजों के पैरामीटर्स और उनसे वसूली जा रही फीस जैसा ब्योरा रोज अपडेट करें।
- मरीजों की संख्या के हिसाब से ऑक्सीजन तय सीमा से कम होते ही अस्पताल के लिए अलर्ट जारी हो। डिस्ट्रीब्यूशन के जिम्मेदार अधिकारी के पास मैसेज जाए। दो-तीन घंटे में ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था हो।
- CMO और DC पोर्टल/ऐप्प के डेटा पर नजर रखेंगे तो ऑक्सीजन की कालाबाजारी भी रुकेगी।
