संजीवनी अस्पताल के गेट पर करीब आधे घंटे तक ऑक्सीजन के लिए तड़पते हुए गांव सूचान की महिला मरीज ने व्हीलचेयर पर दम तोड़ दिया। पूरी घटना का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें बेटा रोते हुए मां की मौत का जिम्मेदार अस्पताल को ठहरा रहा है। डीसी प्रदीप कुमार ने मामले की जांच सीएमओ से करवाने के बात कही है। उन्होंने पोर्टल पर दर्शाए जा रहे व वास्तव में अस्पतालों में उपलब्ध ऑक्सीजन व वेंटिलेटर बेड्स की संख्या में आ रहे अंतर की जांच कराने की बात कही।
मृतक महिला के बेटे अमर सिंह ने बताया कि 60 वर्षीय मां तुलसी देवी कोविड मरीज नहीं थी। सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। अगर ऑक्सीजन लग जाती तो उसकी मां जिंदा होती। मगर हमारी गरीब हालत देखकर डाॅक्टर ने अस्तपाल में भर्ती नहीं किया और जेसीडी के अस्पताल में ले जाने के लिए कह दिया। जब वह जेसीडी गया तो वहां भी मना कर दिया। जब तक लौटा तो मां संजीवनी अस्पताल के गेट आगे दम तोड़ चुकी थी।
वहीं, संजीवनी अस्पताल के डॉ. अंजनी अग्रवाल ने कहा कि यहां ऑक्सीजन बेड खाली नहीं था। इसलिए परिजनों को तुरंत सिविल अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया था, लेकिन वह अस्पताल के बाहर गाड़ी के इंतजार में बैठ गया। आधे घंटे बाद स्टाफ ने संभाला, तो उसने मरीज को अंदर नहीं लाने दिया।
सोशल मीडिया पर वीडियो देखा तो भागे आए डॉक्टर
व्हीलचेयर पर तड़पते हुए महिला का लोगों ने वीडियो सोशल मीडिया पर डाला तो कुछ देर बाद डॉक्टर को पता लगा तो वे भागकर आए। फिर एंबुलेंस भी उपलब्ध करवाई गई, मगर एंबुलेंस का हम क्या करते जब मां की मौत बिना ऑक्सीजन के तड़पते हो गई थी।
